भारतीय प्रधानमंत्री की श्रीलंका यात्रा

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  • पृष्ठभूमि
    श्रीलंका सामरिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक एवं आर्थिक दृष्टि से भारत का महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है। दोनों देशों की बौद्धिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और परस्पर भाषायी संबंधों की एक विरासत है। हाल के वर्षों में सभी स्तरों पर दोनों देशों के मध्य संबंधों में प्रगाढ़ता आई है। जहां एक तरफ व्यापार एवं निवेश में वृद्धि हुई है, वहीं दूसरी तरफ विकास, शिक्षा, संस्कृति एवं रक्षा के क्षेत्रों में दोनों देश सहयोग करते हैं। साथ ही अंतरराष्ट्रीय रुचि के प्रमुख मुद्दों पर दोनों देश व्यापक समझ रखते हैं। यद्यपि कच्चातिवू द्वीप विवाद, मत्स्ययन विवाद, तमिल समस्या आदि भारत-श्रीलंका संबंधों के नकारात्मक पक्ष हैं किंतु श्रीलंका के आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्ति एवं जनसंख्या के वंचित वर्गों हेतु भारत की विकासात्मक सहायता परियोजनाओं के कार्यान्वयन में हुई महत्वपूर्ण प्रगति से दोनों देशों की मित्रता में प्रगाढ़ता आई है। इसी परिप्रेक्ष्य में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘अंतरराष्ट्रीय वेसाक दिवस’ समारोह में शामिल होने के लिए श्रीलंका की यात्रा की।
  • भारतीय प्रधानमंत्री की श्रीलंका यात्रा
  • 11-12 मई, 2017 के मध्य भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोलंबो में आयोजित ‘14वें अंतरराष्ट्रीय वेसाक दिवस’ (14th International Vesak Day) समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने के लिए श्रीलंका की यात्रा पर रहे।
  • भारत में जिस दिन ‘बुद्ध पूर्णिमा’ मनाई जाती है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसी दिन ‘वेसाक दिवस’ मनाया जाता है।
  • ध्यातव्य है कि भगवान बुद्ध का जन्म, उनको ज्ञान की प्राप्ति एवं उनका महापरिनिर्वाण पूर्णिमा को हुआ था।
  • संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 1999 में ‘अंतरराष्ट्रीय वेसाक दिवस’ को आधिकारिक मान्यता प्रदान की गई थी।
  • यह पहला अवसर था जब अंतरराष्ट्रीय वेसाक दिवस का आयोजन श्रीलंका में किया गया जिसका केंद्रीय विषय (Theme) ‘सामाजिक न्याय एवं सतत विश्व शांति हेतु बौद्ध शिक्षाएं (Buddhist Teachings for Social Justice and Sustainable World Peace) था।
  • श्रीलंकाई राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना के निमंत्रण पर श्रीलंका की यात्रा पर गए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मार्च, 2015 के पश्चात यह दूसरी श्रीलंका यात्रा है।
  • यात्रा के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री कोलंबो में स्थित प्रसिद्ध ‘गंगा-रमैय्या मंदिर’ (Ganga-Ramaiyya Temple) गए, जहां उन्होंने पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन समारोह में भाग लिया।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘श्री दलदा मालिगावा भी गए, जिसे पवित्र दंत अवशेष मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
  • यात्रा के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री ने भारत सरकार के सहयोग से ‘श्रीलंकाई बौद्ध अकादमी’ (Srilankan Buddhist Academy) द्वारा स्थापित किए जा रहे ‘कैडियाई नृत्य संकाय’ (Faculty of Kandyan Dance) का शिलान्यास किया।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका के उत्तर प्रादेशिक क्षेत्र (Upcountry Region) में 50 करोड़ रुपये की भारतीय सहायता से निर्मित 150 बिस्तरों वाले मल्टी स्पेशियल्टी डिकोया अस्पताल का उद्घाटन किया।
  • यह पहला अवसर है जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने श्रीलंका के उत्तर-प्रादेशिक पहाड़ी क्षेत्र की यात्रा की।
  • श्रीलंका के इस क्षेत्र के प्रमुख निवासी भारतीय मूल के तमिल हैं।
  • यात्रा के दौरान उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना एवं प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे से मुलाकात की।
  • गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय वेसाक दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में श्रीलंका गए थे इसलिए दोनों देशों के मध्य किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए गए।
  • भारत-श्रीलंका संबंध
  • राजनीतिक संबंध
  • भारत एवं श्रीलंका के राजनीतिक संबंधों को नियमित अंतराल पर होने वाली उच्चस्तरीय राजनीतिक यात्राओं में देखा जा सकता है।
  • श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने 25-29 अप्रैल, 2017 के मध्य भारत की यात्रा संपन्न की।
  • श्रीलंकाई राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना 13-14 मई, 2016 के मध्य भारत की कार्यकारी यात्रा पर आए।
  • भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13-14 मार्च, 2015 के मध्य श्रीलंका की यात्रा पर रहे।
  • व्यापारिक संबंध
  • श्रीलंका दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (SAARC) में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है जबकि भारत वैश्विक स्तर पर श्रीलंका का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।
  • मार्च, 2000 में ‘भारत-श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौता’ के प्रभावी होने के बाद दोनों देशों के व्यापार में तीव्र वृद्धि हुई।
  • श्रीलंकाई सीमा शुल्क के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 में द्विपक्षीय व्यापार 4.7 बिलियन डॉलर था।
  • जनवरी-सितंबर, 2016 के मध्य भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय व्यापार 3.22 बिलियन डॉलर था।
  • वर्ष 2003 के बाद 1 बिलियन डॉलर निवेश के साथ भारत, श्रीलंका में शीर्ष चार निवेशकों में से एक है।
  • विकासात्मक सहयोग
  • श्रीलंका में सशस्त्र विद्रोह की समाप्ति के पश्चात भारत द्वारा विविध विकासात्मक कार्य किए जा रहे हैं जिनमें शामिल हैं- उत्तरी रेलवे लाइन का पुनर्निर्माण, व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना, जापना में सांस्कृतिक केंद्र का निर्माण, उत्तरी प्रांत में कृषि अनुसंधान संस्थान की स्थापना आदि।
  • भारत सरकार द्वारा श्रीलंका में 1372 करोड़ रुपये की लागत से 50,000 आवासीय इकाइयों का निर्माण किया जा रहा है।
  • 2.6 बिलियन डॉलर के साथ श्रीलंका, भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाले विकास ऋण के प्रमुख प्राप्तकर्ताओं में से एक है।
  • सांस्कृतिक संबंध
  • भारत सरकार एवं श्रीलंका सरकार के मध्य 29 नवंबर, 1977 को सांस्कृतिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
  • कोलंबो स्थित ‘भारतीय सांस्कृतिक केंद्र’ भारतीय संगीत, नृत्य, हिंदी भाषा एवं योग की कक्षाओं के माध्यम से सक्रिय रूप से भारतीय संस्कृति के विषय में जागरूकता को प्रोत्साहन देता है।
  • अप्रैल, 2015 में भारत सरकार द्वारा श्रीलंकाई पर्यटकों हेतु ‘ई-टूरिस्ट वीजा’ का शुभारंभ किया गया।
  • भारत-श्रीलंका के मध्य द्विपक्षीय मुद्दे
  • भारत एवं श्रीलंका के मध्य संबंधों पर प्रवासी भारतीयों की समस्या, कच्चातिवू द्वीप की समस्या, मछुआरों की समस्या, तमिल समस्या आदि ने विपरीत प्रभाव डाला है।
  • प्रवासी भारतीयों की समस्या
  • श्रीलंका में रहने वाले भारतीय मूल (PIO) के लोगों में सिंधी, बोरा (Borahs), गुजराती, मेमोन (Memons), पारसी, मलयाली एवं तेलुगू भाषी हैं।
  • गैर-सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अनुमान है कि लगभग 14000 भारतीय प्रवासी श्रीलंका में रहते हैं।
  • भारत एवं श्रीलंका के मध्य भारतीय प्रवासियों की समस्या के समाधान हेतु जनवरी, 1954 में एक समझौता हुआ, जिसे नेहरू-कोटलेवाला समझौता के नाम से जाना जाता है।
  • तमिल समस्या
  • भारतीय मूल के तमिल श्रीलंका के केंद्रीय, उवा (UVA) एवं साब्रागामुवा प्रांतों में चाय या रबड़ के बागानों में काम करते हैं।
  • सरकारी जनगणना के आंकड़ों (2011) के अनुसार, श्रीलंका में भारतीय मूल के तमिल नागरिकों की संख्या लगभग 1.6 मिलियन है।
  • भारत एवं श्रीलंका के मध्य तमिल समस्या के समाधान हेतु कोलंबो समझौता जुलाई, 1987 में हुआ था।
  • मछुआरों की समस्या
  • 2 जनवरी, 2016 को कोलंबो में भारत एवं श्रीलंका के मध्य मछुआरों एवं मत्स्ययन के मुद्दे पर मंत्रिस्तरीय वार्ता का आयोजन किया गया।
  • यह वार्ता दिसंबर, 2016 में नई दिल्ली में मत्स्ययन पर संयुक्त कार्य समूह की प्रथम बैठक के बाद आयोजित की गई।
  • नवंबर, 2016 में दोनों देशों के मध्य मत्स्ययन विवाद के समाधान हेतु संयुक्त कार्य समूह (JWC) का गठन किया गया था।
  • कच्चातिवू द्वीप विवाद
  • कच्चातिवू द्वीप रामेश्वरम से लगभग 10 मील दूर भारत एवं श्रीलंका के मध्य पाक जलडमरुमध्य में स्थित है।
  • 280 एकड़ क्षेत्रफल वाले इस द्वीप को वर्ष 1974 में एक समझौते के तहत भारत ने श्रीलंका को सौंप दिया था।
  • वर्तमान समय में तमिलनाडु के राजनीतिक दल (AIADMK एवं DMK) कच्चातिवू द्वीप को श्रीलंका से वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
  • निष्कर्ष
    श्रीलंका, भारत की ‘पड़ोस पहले’ (Neighbourhood First) नीति का महत्वपूर्ण अंग है। चारों तरफ समुद्र से घिरा यह द्वीपीय देश भारत के लिए न केवल सामरिक महत्व रखता है बल्कि व्यापारिक, आर्थिक एवं राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। भारत द्वारा श्रीलंका को 2.6 बिलियन डॉलर की विकासात्मक सहायता प्रदान की गई है जिसमें 436 मिलियन डॉलर अनुदान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया श्रीलंका यात्रा के दौरान भले ही कोई बड़े व्यापारिक समझौते न हुए हों, किंतु इसके गहरे निहितार्थ हैं। भारत सांस्कृतिक पहल के अलावा श्रीलंका के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का इच्छुक है। इसी क्रम में भारत द्वारा दक्षिण एशिया उपग्रह का प्रक्षेपण करने, कोलंबो एवं काशी को सीधी हवाई सेवा से जोड़ने को महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा सकता है। श्रीलंका से बेहतर संबंध बनाना भारत के हित में है क्योंकि श्रीलंका की भू-राजनीतिक स्थिति हिंद महासागर में विशिष्ट है।

लेखक-नीरज ओझा

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