बैंककारी विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2017

Bankruptcy Regulation (Amendment) Act, 2017

बैंककारी प्रणाली (Banking System) में दबावयुक्त आस्तियां (Stressed Assets) अथवा गैर-निष्पादनकारी आस्तियां (Non-Performing Assets) अस्वीकार्य रूप से उच्च स्तरों पर पहुंच गई हैं। देश के उचित आर्थिक विकास और बैंककारी कंपनियों की वित्तीय दशा को सुधारने के लिए दबावयुक्त आस्तियों के त्वरित समाधान हेतु अत्यावश्यक उपाय करना अपेक्षित है। अतः भारतीय रिजर्व बैंक को प्राधिकृत करने के लिए बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 में उपबंध करना आवश्यक समझा गया जिससे दबावयुक्त आस्तियों के समय पर समाधान हेतु ‘दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016’ के उपबंधों का प्रभावी रूप से प्रयोग करने के लिए किसी बैंककारी कंपनी या बैंककारी कंपनियों को निर्देश जारी किए जा सकें। इसी परिप्रेक्ष्य में बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 में संशोधन करने के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा 4 मई, 2017 को ‘बैंककारी विनियमन (संशोधन) अध्यादेश, 2017’ प्रख्यापित किया गया।

  • 24 जुलाई, 2017 को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बैंककारी विनियमन (संशोधन) अध्यादेश, 2017 को प्रतिस्थापित एवं निरसित करने के लिए ‘बैंककारी विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2017’ लोक सभा में पेश किया।
  • यह विधेयक 3 अगस्त, 2017 को लोक सभा द्वारा और 10 अगस्त, 2017 को राज्य सभा द्वारा पारित किया गया।
  • 25 अगस्त, 2017 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ‘बैंककारी विनियमन (संशोधन), विधेयक, 2017’ को स्वीकृति प्रदान की, जिसके बाद यह विधेयक ‘बैंककारी विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2017’ बना।
  • 4 मई, 2017 को बैंककारी विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2017’ प्रवृत हुआ माना जाएगा।
  • अधिनियम में दबावयुक्त परिसंपत्तियों से संबंधित मामलों के समाधान के प्रावधान किए गए हैं।
  • दबावयुक्त परिसंपत्तियां वे ऋण होते हैं जिनमें उधारकर्ता ने पुनर्भुगतान (Repayment) में चूक (Default) किया हो अथवा जिनमें ऋण को पुनर्गठित (Restructured) किया हो।
  • ऋण पुनर्भुगतान में चूक होने की स्थिति में केंद्र सरकार भारतीय रिजर्व बैंक को अधिकृत कर सकती है कि वह बैंकों को कार्रवाई प्रारंभ करने के लिए निर्देश जारी करे।
  • यह कार्रवाई ‘दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016’ के अंतर्गत की जाएगी।
  • भारतीय रिजर्व बैंक दबावयुक्त परिसंपत्तियों के समाधान के लिए बैंकों को समय-समय पर निर्देश जारी कर सकता है।
  • भारतीय रिजर्व बैंक प्राधिकारियों या समितियों को विनिर्दिष्ट कर सकता है कि वे दबावयुक्त परिसंपत्तियों के समाधान के लिए बैंकों को सलाह दें।
  • उक्त समितियों के सदस्यों की नियुक्ति या मंजूरी भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा की जाएगी।
  • यह अधिनियम भारतीय स्टेट बैंक, उसके सहायक बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों पर भी लागू होगा।

लेखक-नीरज ओझा