प्रधानमंत्री की जापान यात्रा

Prime Minister's visit to Japan

भारत और जापान के संबंध हमेशा से काफी मजबूत और स्थिर रहे हैं। जापान की संस्कृति पर भारत से उद्भूत बौद्ध धर्म का स्पष्ट प्रभाव देखा जा सकता है। भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान भी जापान की शाही सेना ने सुभाष चंद्र बोस की ‘आजाद हिंद फौज’ को सहायता प्रदान की थी। नरसिम्हा राव सरकार की ‘पूर्व की ओर देखो’ नीति ने भारत को जापान के साथ मधुर और पहले से बेहतर संबंध बनाने की ओर प्रेरित किया। हाल ही में संपन्न भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा ने इस रिश्ते को एक नया आयाम दिया है।

  • भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10-12 नवंबर, 2016 के मध्य जापान की यात्रा पर रहे।
  • इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे के बीच कई महत्वपूर्ण करारों पर सहमति हुई।
  • दोनों देशों ने असैन्य परमाणु ऊर्जा को लेकर ऐतिहासिक करार पर हस्ताक्षर किए। इस करार से जापान, भारत में परमाणु तकनीक का निर्यात कर सकेगा।
  • दोनों देशों ने असैन्य परमाणु करार के अतिरिक्त नौ अन्य समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों में आधारभूत संरचना, रेलवे, अंतरिक्ष एवं कृषि में सहयोग से जुड़े समझौते भी शामिल थे।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजो अबे ने शिकनसेन हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन से कोबे शहर का दौरा किया। मुंबई-अहमदाबाद हाई- स्पीड रेलवे में इसी टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जाएगा। कोबे शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय समुदाय को भी संबोधित किया।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी निवेश आमंत्रित करते हुए कहा कि भारत को वित्तीय संसाधनों की अधिक आवश्यक है और उनकी सरकार देश को विश्व की ‘सबसे मुक्त ‘अर्थव्यवस्था बनाने के लिए सुधारों को आगे बढ़ा रही है।
  • ‘इंडिया-जापान बिजनेस लीडर्स फोरम’ में कारोबारी नेताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने जीएसटी मुद्दे पर हुई प्रगति की समीक्षा की और भारत में कारोबार को आसान बनाने के लिए नीतियों और निवेश नियमों में किए गए अन्य सुधारों पर भी चर्चा की।
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए और स्थायी और पारदर्शी नियमन प्रणालियों के माध्यम से सकारात्मक माहौल बनाने के वास्ते सुधार नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • प्रधानमंत्री मोदी जापान जाते हुए कुछ देर के लिए थाईलैंड रुके और वहां के नरेश भूमिबोल अदुलयेदेज को श्रद्धांजलि दी। ज्ञातव्य हो कि थाई नरेश भूमिबोल अदुलयेदेज का पिछले माह निधन हो गया था।

लेखक-राकेश कुमार मिश्रा