प्रथम संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन

First UN Ocean Conference

वर्तमान में महासागरीय संसाधनों के अति-विदोहन की नीति ने विश्व में न केवल राजनीतिक संघर्ष को बढ़ावा दिया है, बल्कि महासागरीय पारिस्थितिकी में असंतुलन भी उत्पन्न किया है। तटीय क्षेत्रों में अति-नौवहन से उत्पन्न पारिस्थितिकी असंतुलन ने द्वीपीय देशों के आर्थिक एवं सामाजिक हितों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया है। महासागरीय पारिस्थितिकी के प्रति वैश्विक समुदाय के द्वारा उपेक्षा का भाव अपनाया जा रहा है, जिसने छोटे द्वीपीय देशों के अस्तित्व को ही खतरे में डाल दिया है, क्योंकि इनकी अर्थव्यवस्था मूलतः सीबोस (Sea BOS : Seafood Business) पर आधारित है। महासागरीय पारिस्थितिकी के संरक्षण एवं समुद्री संसाधनों के धारणीय उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र द्वारा एक ‘वैश्विक प्रयास’ का आह्वाहन किया गया है।

  • 5-9 जून, 2017 के मध्य संयुक्त राष्ट्र द्वारा न्यूयॉर्क में प्रथम महासागर सम्मेलन का आयोजन किया गया।
  • इस सम्मेलन का उद्देश्य सतत विकास लक्ष्य-14; जलीय जीवन (Life Below Water) के क्रियान्वयन में वैश्विक भागीदारी को बढ़ावा देना है।
  • सम्मेलन का शीर्षक ‘हमारा महासागर, हमारा भविष्य’ (Our Ocean, Our Future) था।
  • इस सम्मेलन में 178 देशों तथा यूरोपियन यूनियन सहित संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न संगठनों और कई गैर-सरकारी संगठनों ने हिस्सा लिया।
  • सम्मेलन की अध्यक्षता के लिए फिजी के प्रधानमंत्री जोसाय वोरेक बैनीमारामा और स्वीडन की उप-प्रधानमंत्री इसाबेला लॉविन को चुना गया।
  • सम्मेलन के दौरान ‘विश्व महासागर दिवस’ (8 जून) को विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
  • सम्मेलन में 7 भागीदारी वार्ताओं का आयोजन किया गया जो इस प्रकार है-
क्र.सं. वार्ताकार देश विषय
1. इंडोनेशिया – नॉर्वे समुद्री प्रदूषण
2. पलाउ – इटली समुद्री एवं तटीय पारिस्थितिकी का प्रबंधन, संरक्षण एवं पुनर्स्थापन।
3. मोनैको-मोजाम्बिक महासागरीय अम्लीकरण का न्यूनीकरण।
4. कनाडा-सेनेगल मत्स्य उद्योग को धारणीय बनाना।
5. एस्टोनिया-ग्रेनाडा द्वीपीय एवं अल्पविकसित देशों के आर्थिक लाभ की वृद्धि
6. आइसलैंड-पेरू समुद्री प्रौद्योगिकी के वैज्ञानिक ज्ञान एवं अनुसंधान क्षमता का विकास तथा उनका हस्तांतरण।
7. ऑस्ट्रेलिया-केन्या अंतरराष्ट्रीय कानूनों के द्वारा महासागरों एवं उसके संसाधनों का संरक्षण तथा उनका धारणीय उपयोग।
  • अंतिम दिन 14 सूत्री ‘कार्यवाही आह्वाहन-पत्र’ (Call for Action) के मसौदे को स्वीकार किया गया।
  • भारत
  • 8 जून, 2017 को भारत के बाह्य मामलों के राज्य मंत्री एम.जे. अकबर ने सम्मेलन को संबोधित किया।
  • उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय ध्वज के अशोक चक्र को ‘ब्लू चक्र’ के रूप में व्याख्यायित करने का उल्लेख करते हुए भारत के लिए समुद्र-आधारित क्रिया-कलापों के महत्व को रेखांकित किया।
  • इस अवसर पर उन्होंने भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास भागीदारी निधि का शुभारंभ किया।
  • यह निधि प्रशांत महासागर के द्वीपीय देशों के सतत विकास कार्यक्रमों को सहायता प्रदान करेगा।
  • जनवरी, 2016 से ‘सतत विकास लक्ष्य’ (Sustainable Development Goal) प्रभावी हुआ।
  • इसके अंतर्गत कुल 17 लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
  • लक्ष्य संख्या 14 का शीर्षक-‘जलीय जीवन’ है।
  • इसका उद्देश्य है-
  • समुद्री एवं तटीय पारिस्थितिकी का स्थायी संरक्षण एवं प्रबंधन।
  • सागर अम्लीकरण का समाधान।
  • महासागरीय संसाधनों का टिकाऊ उपयोग।
  • अंतरराष्ट्रीय महासागरीय कानूनों का बेहतर क्रियान्वयन।

लेखक-श्याम सुन्दर यादव