दक्षिण-पूर्व एशिया में किशोरों की मानसिक स्वास्थ्य स्थिति; रिपोर्ट

Mental Healthy Status Report of Adolescents in Southeast Asia

किशोर दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सामाजिक और जनांकिकीय समूह का गठन करते हैं। किशोर इस क्षेत्र की कुल जनसंख्या का 5वां हिस्सा (आबादी 362.2 मिलियन) है। बच्चों एवं किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं (अवसाद इत्यादि) को पहचानने और इसके कारणों का पता लगाने में हमारी विफलता, सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के संदर्भ में एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है। मानसिक स्वास्थ्य एवं अन्य स्वास्थ्य, शैक्षिक, सामाजिक और विकास समस्याओं के बीच बहु-दिशात्मक संबंध हमें इस क्षेत्र में सुधार करने हेतु विशेष कार्यवाही की प्रेरणा देता है। मानसिक स्वास्थ्य को विमर्श के केंद्र में लाने हेतु आंकड़ों एवं तथ्यों की आवश्यकता है।

  • 7 अप्रैल, 2017 को विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा एक रिपोर्ट-‘दक्षिण-पूर्व एशिया में किशोरों की मानसिक स्वास्थ्य स्थिति : कार्यवाही के लिए साक्ष्य’ प्रकाशित की गई।
  • भारत के संदर्भ में, इस रिपोर्ट में उल्लिखित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य निम्न हैं-
  • किशोरों (13-15 वर्ष) की कुल आबादी 75.5 मिलियन है, जो कुल आबादी का 5.8 प्रतिशत है।
  • पिछले 12 महीनों में 15-29 वर्ष की आयु वर्ग में आत्महत्या दर-35.5 प्रति 100000 है, जो इस क्षेत्र में अधिकतम है।
  • भारतीय किशोरों में तंबाकू सेवन करने वाले 4 प्रतिशत, सिगरेट पीने वाले 1 प्रतिशत, ड्रग्स का प्रयोग करने वाले 3 प्रतिशत लोग हैं।
  • भारत में शाब्दिक हिंसा के शिकार किशोर 7 प्रतिशत है।
  • इस रिपोर्ट को बनाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों द्वारा कार्यान्वित नवीनतम वैश्विक स्कूल-आधारित छात्र स्वास्थ्य सर्वेक्षण (GSHS) के आंकड़ों का प्रयोग किया गया है।
  • GSHS के तहत माध्यमिक एवं हाईस्कूल विद्यालयों में नामांकित छात्र लगभग 13-17 वर्ष की आयु के किशोरों से आंकड़े एकत्र किए गए हैं, जबकि भारतीय सर्वेक्षण में केवल माध्यमिक विद्यालयों में नामांकित 13-15 वर्ष की आयु के बच्चों को शामिल किया गया है।
  • भारतीय सर्वेक्षण में एकत्रित आंकड़े वर्ष 2007 के हैं और केवल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (Central Board of Secondary Education : CBSE) से संबद्ध स्कूलों से लिए गए हैं।
  • GSHS युवाओं में मृत्यु दर एवं मनोरोग के लिए उत्तरदायी सुरक्षात्मक उपायों एवं व्यवहार संबंधी कारकों का मापन करता है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैश्विक स्वास्थ्य अनुमान वर्ष 2015 के अनुसार, दक्षिणी-पूर्वी एशिया के 15-29 वर्ष की आयु वर्ग के व्यक्तियों में आत्महत्या, सड़क-दुर्घटना के बाद दूसरा सबसे बड़ा मृत्यु का कारण है।
  • WHO में दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के 11 देश शामिल हैं, जिनमें से केवल तीन (श्रीलंका, भूटान और थाईलैंड) के पास आत्महत्या रोकथाम नीति है और 8 देशों के पास मानसिक स्वास्थ्य नीति है।
  • दक्षिण-पूर्व एश्यिा में आत्महत्या का उच्च प्रतिशत सामाजिक-आर्थिक समस्या से ज्यादा, एक मानसिक स्वास्थ्य समस्या है।
  • प्रति वर्ष 7 अप्रैल को WHO के गठन के अवसर पर विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है, इस वर्ष का विषय था-‘अवसाद : आओ चर्चा करें’ (Depression Let’s talk)।
  • अवसाद की रोकथाम की नई रणनीति के आधार स्तंभ के रूप में मनोरोग (Psychiatric) सुविधाओं/सेवाओं को सामुदायिक केंद्रों पर उपलब्ध करवाकर, मानसिक विकारों के संदर्भ में उत्पन्न उपचार-अंतराल (Treatment-Gap) को भरने का प्रयास किया जा रहा है।
  • दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में यह अंतराल 90 प्रतिशत है।
  • इस क्षेत्र में उपचार-अंतराल को भरने के लिए अमेरिका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (National Institutes of Health) द्वारा मानसिक स्वास्थ्य पर एक प्रोजेक्ट-SHARE (South Asian Hub for Advocacy, Resarch & Education) की स्थापना की गई है।
  • नेपाल और भारत के लिए एक अन्य प्रोजेक्ट PRIME (Programme for Improving Mental Health-Care) प्रारंभ किया गया है।
  • WHO की दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय इकाई द्वारा प्राथमिक सेवा केंद्रों के उपयोग हेतु ‘अवसाद पहचान यंत्र’ (Depression Identi-fication Instrument) विकसित किया जा रहा है, जो बांग्लादेश (बांग्ला), भारत (हिंदी) और नेपाल (नेपाली) के लिए है।
  • यह एक प्रश्नावली के रूप में होगा।

लेखक-श्याम सुन्दर यादव