UPSI Toh Online Test Series

UPSI Toh Online Test Series

UPSI Toh Online Test Series More »

SSC Toh Online Prep. Test Series

SSC Toh Online Prep. Test Series

SSC Toh Online Prep. Test Series More »

SSC Toh CHSL (10+2) Online Test Series

SSC Toh CHSL (10+2) Online Test Series

SSC Toh CHSL (10+2) Online Test Series More »

Delhi Police Constable Online Test Series

Delhi Police Constable Online Test Series

Delhi Police Constable Online Test Series More »

Railway Mains Toh Online Test Series

Railway Mains Toh Online Test Series

Railway Mains Toh Online Test Series More »

 

तीन व्यक्तियों के DNA से जन्मा शिशु

Three persons born infant
  • कब और कहां?
    6 अप्रैल, 2016 को तीन व्यक्तियों (माता, पिता एवं अंडाणु दाता) के डी.एन.ए. को मिलाकर एक नई पद्धति से मेक्सिको में एक शिशु को जन्म दिया गया है। इस शिशु के माता-पिता जॉर्डन देश के निवासी हैं। इस प्रक्रिया को न्यूयॉर्क स्थित ‘न्यू होप फर्टिलिटी सेंटर’ में कार्यरत डॉक्टरों की टीम ने डॉ. जॉन झांग (Dr. John Jhang) के नेतृत्व में संपन्न किया गया। इस टीम ने इस प्रक्रिया को मेक्सिको जाकर अंजाम दिया, क्योंकि वहां इस प्रक्रिया पर प्रतिबंध लगाने वाले नियम मौजूद नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब तीन व्यक्तियों के DNA से किसी शिशु का जन्म कराया गया हो। इसके पूर्व 1990 के दशक में अनुसंधानकर्ताओं ने एक अलग प्रक्रिया से यह उपलब्धि प्राप्त की थी, जबकि इस बार एक नई पद्धति से इस काम को अंजाम दिया गया है।
  • क्यों?
    जॉर्डन निवासी इस दंपत्ति की पूर्व की संतानें एक घातक आनुवांशिक रोग लेघ सिंड्रोम (Leigh Syndrome) के कारण मृत्यु को प्राप्त हो चुकी थीं। स्त्री के अंडाणु में उपस्थित एक-चौथाई माइटोकॉन्ड्रिया में लेघ सिंड्रोम के जींस उपस्थित थे। ये जींस माइटोकॉन्ड्रिया में उपस्थित DNA में उत्परिवर्तन (Mutation) के कारण प्रकट हो गए थे। यह बीमारी माता से उसकी संतान में जाती है तथा बच्चे के विकसित होते हुए तंत्रिका तंत्र पर घातक प्रभाव डालती है।
  • प्रक्रिया
    दंपत्ति की इस समस्या का समाधान करने हेतु डॉक्टरों की टीम ने ‘स्पिंडल न्यूक्लियर ट्रांसफर (Spindle Nuclear Transfer) तकनीक का सहारा लिया।
    इस तकनीक के द्वारा डॉ. झांग ने सर्वप्रथम एक स्वस्थ दाता (Healthy Donor) स्त्री के अंडे से केंद्रक (Nucleus) निकाल दिया जिससे यह केंद्रक रहित अंडाणु हो गया। फिर लेघ सिंड्रोम से ग्रसित माता के अंडाणु का केंद्रक निकालकर उसे दाता के केंद्रक रहित अंडाणु में प्रत्यारोपित कर दिया गया। इस प्रकार इस अंडाणु में, स्वस्थ दाता के कोशिका द्रव्य जिसमें स्वस्थ माइटोकॉन्ड्रिया उपस्थित है तथा जन्म लेने वाले शिशु की माता के केंद्रक, दोनों की प्राप्ति कर ली गई। पुनः इस अंडे का पिता के शुक्राणु से निषेचन (Fertilization) करवाया गया। इस प्रकार प्राप्त भ्रूण में, माता-पिता से प्राप्त केंद्रकीय DNA तथा स्त्री दाता के माइटोकॉन्ड्रिया का DNA उपस्थित था। इस भ्रूण को माता में प्रत्यारोपित कर एक स्वस्थ शिशु का जन्म कराया गया।
  • लाभ
    1. इस प्रक्रिया द्वारा भविष्य में कई जानलेवा बीमारियों से रहित शिशुओं का जन्म संभव हो सकेगा।
    2. दंपत्तियों का माता-पिता बनने का स्वप्न पूरा होगा।
    3. इस उपचार तकनीक से आनुवांशिक बीमारियों को नई पीढ़ी में जाने से रोका जा सकेगा।
  • आशंकाएं
    माता के अंडाणु से केंद्रक निकालते समय सभी प्रभावित माइटोकॉन्ड्रिया से मुक्ति पाना संभव नहीं है। अगर लेघ सिंड्रोम से ग्रस्त थोड़े से भी माइटोकॉन्ड्रिया, स्वस्थ स्त्री दाता के अंडाणु में चले गए तो ये फिर से गुणन करके बीमारी उत्पन्न होने की आशंका को बढ़ा सकते हैं।
    अन्य देशों में इस नवीन पद्धति को वैधानिक स्वीकृति मिलेगी या नहीं, इस पर संशय है।
    नैतिक धरातल (Ethical Ground) पर इस प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।

लेखक-गोपाल कृष्ण पाण्डेय