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ज्वॉइंट सी, 2016 : चीन-रूस संयुक्त सैन्याभ्यास

Joint sea, 2016, China -Russia joint military exercise

12-19 सितंबर, 2016 के मध्य दक्षिण चीन सागर में चीन और रूस ने बड़े स्तर पर नौसैनिक युद्धाभ्यास किया।

  • वर्ष 2012 से शुरू किया गया यह पांचवां चीन-रूस ‘संयुक्त नौसैन्याभ्यास’ है जो इस बार चीन के ‘गुवांगदोंग’ प्रांत में संपन्न हुआ।
  • इस युद्धाभ्यास में दोनों पक्षों की ओर से नौसेना के सतह, जलयान, पनडुब्बियां, फिक्स्ड विंग एयरक्रॉफ्ट, शिप वार्न हेलीकॉप्टर, उभयचर बख्तरबंद उपकरण व नौसैनिक टुकड़ियां शामिल रहीं।
  • दोनों पक्षों ने यहां रक्षा, बचाव, पनडुब्बी रोधी कार्यवाहियों के अतिरिक्त संयुक्त द्वीपों पर कब्जा करने एवं अन्य गतिविधियों से संबंधित युद्धाभ्यास किया।
  • इस युद्धाभ्यास में चीन की ओर से ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी’ (Peoples Liberation Army Navy-PLAN) के अंतर्गत नान्हाई फ्लीट के जवान सम्मिलित थे।
  • विवादित जल क्षेत्र के निकट इस युद्धाभ्यास द्वारा चीन, संयुक्त राष्ट्र एवं उससे सहयोगियों को यह संदेश देना चाहता है कि जल क्षेत्र में प्रतिद्वंद्वियों के इस प्रादेशिक दावे के बीच उसके साथ रूस जैसा शक्तिशाली भागीदार है।
  • उल्लेखनीय है कि जुलाई, 2016 में ‘अंतरराष्ट्रीय स्थायी न्यायाधिकार’ (Permanent Court of Arbitration-PCA) द्वारा दक्षिण चीन सागर में चीनी दावे को खारिज किए जाने के बाद इस क्षेत्र में चीनी हस्तक्षेप को बंद करने के लिए चीन पर वैश्विक दबाव बढ़ गया है।
  • जबकि चीन ने अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण के इस फैसले को मानने से साफ इंकार कर दिया है।
  • चीन, दक्षिण चीन सागर के 80 प्रतिशत हिस्से पर अपना दावा करता है जबकि मलेशिया, ताइवान, फिलीपींस, वियतनाम और ब्रुनेई भी इस क्षेत्र पर अपना हक जताते हैं।

लेखक-विक्रम प्रताप सिंह