जैविक कृषि उत्पादों का अप्रतिबंधित निर्यात

Unrestricted export of organic farm products
  • जैविक खेती
    जैविक खेती कृषि की वह पद्धति है जो रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और खर-पतवारनाशियों के अप्रयोग अथवा न्यूनतम प्रयोग पर आधारित है। जैविक खेती में हरी खाद, कम्पोस्ट, जैव-नाशियों (Bio-Pesticides) आदि का उपयोग किया जाता है, जिससे न केवल भूमि की उर्वरा शक्ति लंबे समय तक बनी रहती है बल्कि पर्यावरण भी प्रदूषित नहीं होता। साथ ही कृषि लागत घटने और उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ने से किसान को अधिक लाभ प्राप्त होता है।
    भारत में विविध कृषि जलवायु क्षेत्रों के कारण विविध किस्मों के जैविक उत्पादों के उत्पादन की वृहद क्षमता उपलब्ध है। देश के कई भागों में विरासत में मिली जैविक खेती की परंपरा एक अतिरिक्त सुअवसर है। निर्यात बाजार की तीव्र वृद्धि के फलस्वरूप देशीय बाजार में भी उत्तरोत्तर प्रगति हो रही है जो जैविक उत्पादकों के लिए अपने उत्पादों के निरंतर विक्रय हेतु आशाजनक संकेत है।
  • जैविक कृषि उत्पादों का अप्रतिबंधित निर्यात
  • 31 मार्च, 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) द्वारा ‘विशिष्ट जैविक उत्पादों’ पर सभी मात्रात्मक सीमाओं को हटाने की स्वीकृति प्रदान की गई।
  • साथ ही सभी जैविक कृषि और जैविक प्रसंस्कृत उत्पादों के अप्रतिबंधित निर्यात की अनुमति प्रदान की गई, भले ही उनके मूल उत्पाद (गैर-जैविक) के निर्यात पर वर्तमान अथवा भविष्य में किसी भी प्रकार का प्रतिबंध/निषेध क्यों न हो।
  • देश में जैविक दालों एवं मसूर की भारी कमी को देखते हुए इनके निर्यात पर मात्रात्मक सीमा को बनाए रखा गया है किंतु
  • यह सीमा वर्तमान के 10,000 मीट्रिक टन (MT) से बढ़ाकर 50,000 मीट्रिक टन कर दिया गया है।
  • गेहूं, चीनी, गैर-बासमती चावल एवं जैविक चीनी पर मात्रात्मक सीमा हटने और जैविक दालों की निर्यात सीमा बढ़ाए जाने से किसानों की आय दोगुना करने संबंधी सरकार के उद्देश्य को पूरा करने में मदद मिलेगी।
  • इससे कृषि की निवेश लागत घटेगी एवं जैविक कृषि उत्पादों के प्रीमियम मूल्य (Premium Price) प्राप्त होगा जिसके फलस्वरूप अधिक से अधिक किसान जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
  • जैविक कृषि उत्पाद निर्यात सरकारी प्रयास
  • निर्यात होने वाले सभी जैविक उत्पाद ‘राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम’ (National Programme for Organic Production : NPOP) के तहत ‘कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण’ (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority : APEDA) द्वारा प्रमाणित किए जाते हैं।
  • जैविक कृषि उत्पादों के देश एवं विदेश में मौजूद अपार अवसरों के दोहन हेतु सरकार किसानों तथा निर्यातकों की मदद कर रही है।
  • जैविक उत्पादों के निर्यात संबंधी एक स्थिर एवं सुसंगत निर्यात नीति से निर्यातकों को खरीददारों के लिए दीर्घकालिक प्रतिबद्धता जताने और किसानों के साथ लिंकेज स्थापित करने में मदद मिलेगी।
  • जैविक कृषि उत्पादों के लिए एक स्थिर निर्यात नीति देश में जैविक खेती को बढ़ावा देने हेतु प्रारंभ किए गए विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों जैसे ‘स्थायी कृषि पर राष्ट्रीय मिशन’ (NSAM), ‘परंपरागत कृषि विकास योजना’ (PKVY), ‘पूर्वोत्तर क्षेत्र में जैव मूल्य शृंखला विकास’ (Ovcdner) आदि के लिए पूरक है।
  • भारत में जैविक कृषि उत्पादन एवं निर्यात
  • भारत द्वारा वर्ष 2015-16 में प्रमाणित जैविक उत्पादों का लगभग 1.35 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन किया गया।
  • इन जैविक उत्पादों में शामिल थे-गन्ना, तिलहन, अनाज एवं बाजरा, कपास, दालें, औषधीय पौधे, मसाले, मेवे, सब्जियां, कॉफी आदि।
  • वर्ष 2015-16 के दौरान जैविक उत्पादों का कुल निर्यात मात्रा 263687 मीट्रिक टन थी।
  • इस अवधि में जैविक खाद्य निर्यात विक्रय 298 मिलियन यू.एस. डॉलर था।
  • जैविक उत्पाद का निर्यात यूरोपीय संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, स्विट्जरलैंड, कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड आदि देशों को किया गया।
  • जैविक उत्पाद निर्यात में सर्वाधिक निर्यात तिलहन (50%) का किया गया और इसके बाद प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद (25%), अनाज एवं बाजरा (17%), चाय (2%), दालें (2%), मसाले (1%), मेवे (1%) आदि का निर्यात किया गया।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • सभी राज्यों में जैविक प्रमाणीकरण के अधीन सबसे अधिक क्षेत्र मध्य प्रदेश में है जिसके बाद हिमाचल प्रदेश एवं राजस्थान का स्थान है।
  • जनवरी, 2016 में सिक्किम भारत का पहला पूर्णतः जैविक राज्य बन गया है।
  • अपने संपूर्ण कृषि उत्पाद को जैविक बनाने हेतु कानून बनाने वाला देश का प्रथम राज्य मिजोरम है।
  • वर्ष 2013-14 में कुल जैविक प्रमाणीकरण के तहत कृषि योग्य भूमि के संबंध में शीर्ष देशों में भारत 10वें स्थान पर है।
  • वृहद् स्तर पर जैविक कृषि अपनाने वाला विश्व का पहला देश ‘क्यूबा’ है।

लेखक-नीरज ओझा

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