एपीएमसी मॉडल एक्ट, 2017

apmc model act 2017

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना किया जाए। इस हेतु तीन स्तरों पर कार्य करने की आवश्यकता है। प्रथम, उत्पादन लागत में कमी तथा उत्पादकता में वृद्धि, द्वितीय कृषि आधारित कुटीर उद्योगों एवं क्रिया-कलापों को प्रोत्साहन, तृतीय तथा सबसे महत्वपूर्ण विपणन हेतु प्रतिस्पर्धी बाजार का सृजन।
पूरे देश में कृषि बाजार ‘राज्य कृषि उत्पाद बाजार कमेटी’ (State Agriculture Produce Market Committee) द्वारा विनियमित होते हैं। बाजार पर सरकार के नियंत्रण ने प्रतिस्पर्धी बाजार के सृजन को बाधित करता है। कृषि बाजारों पर सरकारी एकाधिकार को खत्म करने एवं किसानों की उपज का बेहतर मूल्य दिलाने हेतु नए बाजार नियमों की आवश्यकता को देखते हुए कृषि मंत्रालय द्वारा ‘मॉडल एक्ट ऑन एग्रीकल्चर मार्केटिंग’ लाया जा रहा है।

  • 24 अप्रैल, 2017 को कृषि विपणन की जरूरतों को देखते हुए कृषि मंत्रालय द्वारा मॉडल एपीएमसी एक्ट (Model APMC Act), 2017 की घोषणा की गई।
  • इस लागू करने के लिए राज्य सरकारों को भेज दिया गया है।
  • इसे एक्ट के मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं-
  • किसी भी क्षेत्र में कृषि उत्पादों के लिए नए बाजारों की स्थापना हेतु वैध व्यक्तियों, उत्पादकों एवं स्थानीय अधिकारियों को आवेदन करने की अनुमति (मौजूदा कानून के तहत केवल राज्य सरकार के पहल पर ही नए बाजार की स्थापना संभव है)।
  • किसी एक बाजार क्षेत्र के अंतर्गत एक से अधिक बाजार स्थापित किए जा सकते हैं।
  • उत्पादकों को अपनी उपज कृषि उत्पाद बाजार समिति (APMC) द्वारा नियंत्रित मौजूदा बाजारों के माध्यम से ही बेचने की बाध्यता खत्म।
  • मौजूदा बाजारों के अतिरिक्त विशिष्ट कृषि उत्पाद हेतु अलग ‘विशेष कमोडिटी बाजार’ की स्थापना।
  • ‘संविदा कृषि’ (Contract Farming) के प्रायोजकों (Sponcers) के लिए नामांकन अनिवार्य (इस हेतु एक नया अध्याय जोड़ा गया है)।
  • किसी भी बाजार क्षेत्र में अधिसूचित कृषि जिंसों की बिक्री पर बाजार शुल्क की वसूली का प्रावधान राज्य सरकार के विवेकाधीन रखा गया है।
  • एक या एक से अधिक बाजार क्षेत्रों में काम करने के लिए, बाजार अधिकारियों को लाइसेंस देने या उनका पंजीकरण करने हेतु समयबद्ध प्रक्रिया का निर्धारण किया गया है।
  • राज्य सरकारों को, किसी भी कृषि उत्पाद को बाजार शुल्क से मुक्त घोषित करने का, अधिकार दिया गया है।
  • राज्य कृषि बाजार बोर्ड (State Agricultural Marketing Board) को किसानों को बाजार-आधारित सेवाएं प्रदान करने हेतु, बोर्ड में एक अलग ‘विपणन विस्तार सेल’ और अधिसूचित कृषि उत्पादों के वर्गीकरण, मानकीकरण और गुणवत्ता प्रमाणन हेतु एक विपणन मानक ब्यूरो (Marketing Standards Bureau) की स्थापना का उत्तरदायित्व दिया गया है।
  • कृषि उत्पाद बाजार समिति (APMC) को निम्न उत्तरदायित्व दिए गए हैं-
    1. बाजार क्षेत्र में होने वाले लेन-देन एवं मूल्य निर्धारण प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
    2. किसानों को बाजार आधारित सेवाएं प्रदान करना।
    3. यह सुनिश्चित करना कि बेचे गए उत्पाद के लिए किसानों को भुगतान उसी दिन हो जाए।
    4. बिक्री के लिए बाजार में आए कृषि उत्पादों एवं उनके मूल्यों का प्रकाशन करना।
    5. कृषि बाजारों के प्रबंधन में सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देना।
  • वर्तमान में राज्य के समस्त भौगोलिक क्षेत्र को विभाजित करके बाजार क्षेत्र के रूप में घोषित कर दिया जाता है और इनका प्रबंधन राज्य सरकार द्वारा गठित बाजार समितियों द्वारा किया जाता है। एक बार किसी क्षेत्र को बाजार क्षेत्र घोषित कर दिए जाने के बाद, वह बाजार समिति के क्षेत्राधिकार में हो जाता है और किसी भी प्राइवेट व्यक्ति या संस्था द्वारा इस बाजार में थोक विपणन गतिविधियों का कार्यान्वयन प्रतिबंध रहता है। इस प्रकार प्रतिस्पर्धी बाजार के अभाव में किसानों को उनका वाजिब हक नहीं मिल पाता है।

लेखक-श्याम सुन्दर यादव