आसियान का 25वां शिखर सम्मेलन

आसियान (ASEAN) अर्थात ‘एसोसिएशन ऑफ साउथ-ईस्ट एशियन नेशंस’ (Association of Southeast Asian Nations) 10 दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों (इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, वियतनाम, सिंगापुर, कंबोडिया, म्यांमार, थाईलैंड, ब्रुनेई एवं लाओस) का क्षेत्रीय संगठन है।

विश्व के अनेक क्षेत्रीय संगठनों जैसे कि यूरोपीय संघ, अफ्रीकन यूनियन, शंघाई सहयोग संगठन एवं एपेक की भांति आसियान भी एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्रीय संगठन है।

आसियान राष्ट्रों का सकल क्षेत्रफल 4.44 मिलियन वर्ग किमी. है और इसके सदस्य राष्ट्रों की सम्मिलित आबादी लगभग 625 मिलियन है जो कि विश्व जनसंख्या का लगभग 8.8 प्रतिशत है। आसियान देशों का 2.39 ट्रिलियन डॉलर का सकल घरेलू उत्पाद है जो उच्चतर विकास मार्ग पर अग्रसर है। इनकी सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर वर्ष 2013 में 5.1 प्रतिशत रही। वर्ष 2014 और 2015 में इसके क्रमशः 4.6 प्रतिशत और 5.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

आसियान की शक्तिशाली स्थिति एवं बढ़ते प्रभाव के कारण ही न केवल भारत, रूस, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड जैसे राष्ट्रों के साथ इसके संबंध प्रगाढ़ हो रहे हैं बल्कि विश्व के अन्य अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठनों एवं गैर-सरकारी संगठनों ने भी आसियान के साथ संबंध स्थापित किए हैं।

विश्व के लगभग 44 गैर-आसियान राष्ट्रों/संगठनों ने जकार्ता स्थित आसियान के सचिवालय में अपने राजदूतों की नियुक्ति की है।

आसियान का 25वां शिखर सम्मेलन

10 सदस्यीय आसियान देशों का 25वां शिखर सम्मेलन 13 नवंबर, 2014 को म्यांमार की राजधानी नाय पी ताव में संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में ब्रुनेई के सुल्तान, फिलीपींस, म्यांमार एवं इंडोनेशिया के राष्ट्रपतियों, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम, कंबोडिया, लाओस एवं मलेशिया के प्रधानमंत्रियों तथा आसियान के महासचिव ने भाग लिया।

25वें आसियान शिखर सम्मेलन का केंद्रीय विषय (Theme) था-‘‘एक शांतिपूर्ण एवं समृद्ध समुदाय के लिए एकबद्ध आगे बढ़ना। (Moving Forward in Unity, to a Peaceful and Prosperous Community)।

आसियान की शिखर बैठक के परिप्रेक्ष्य में 95 बिंदुओं का चेयरमैन स्टेटमेंट जारी किया गया। चेयरमैन स्टेटमेंट में आसियान आर्थिक समुदाय, आसियान सामाजिक-सांस्कृतिक समुदाय, आसियान के आपसी संपर्क एवं सहयोग संवर्द्धन तथा आसियान के बाह्य संबंधों तथा क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों के ऊपर चर्चा की गई।

चेयरमैन स्टेटमेंट में आसियान चार्टर, इनीशिएटिव फॉर आसियान इंट्रीग्रेशन (IAI) वर्क प्लान-II (2009-15) एवं मास्टर प्लान ऑन आसियान कनेक्टिविटी (MPAC) के महत्त्व पर जोर दिया गया तथा आसियान समुदाय के ‘पोस्ट-2015 विजन’ पर बांदर सेरी बेगावान घोषणा की प्रशंसा की गई।

चेयरमैन स्टेटमेंट में दक्षिण चीन सागर के संबंध में शांति, स्थिरता एवं सामुदायिक सुरक्षा पर जोर दिया गया।

साथ ही स्टेटमेंट में, तिमोर-लेस्ते के आसियान सदस्यता के आवेदन के संबंध में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया गया। आसियान के ध्येय वाक्य (Motto) ‘‘एक दृष्टि, एक पहचान, एक समुदाय’’ (One Vision, One Identity, One Community) को आसियान समुदाय के प्रति सार्थक पाया गया। इसके अतिरिक्त वर्ष 2015 के पश्चात के लिए आसियान समुदाय का नाय पी ताव घोषणा-पत्र जारी किया गया। इस घोषणा-पत्र के साथ आसियान सचिवालय और आसियान के अंगों की समीक्षा एवं इन्हें मजबूत बनाने की अलग से घोषणा की गई।

म्यांमार में संपन्न शिखर सम्मेलन के साथ आसियान की अध्यक्षता मलेशिया को स्थानांतरित की गई। जिस प्रतिबद्धता एवं जिम्मेदारी के साथ म्यांमार ने अध्यक्षीय कार्य का निर्वाह किया वह प्रशंसनीय थी।

मलेशिया अपने अध्यक्षीय कार्यकाल में ‘‘हमारे लोग, हमारा समुदाय, हमारा दृष्टिकोण’’ (Our People, Our Community, Our Vision) विषय पर आसियान की प्रगति में प्रतिबद्ध होगा।

25वें आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान महत्त्वपूर्ण गतिविधियां

आसियान के 25वें शिखर सम्मेलन के दौरान महत्त्वपूर्ण गतिविधियां संक्षेप में इस प्रकार रहीं-

(i)     आसियान+3 की 17वीं शिखर बैठक संपन्न हुई।

(ii)    आसियान एवं चीन के मध्य 17वीं शिखर बैठक संपन्न हुई।

(iii)   आसियान एवं जापान के मध्य 17वीं शिखर बैठक संपन्न हुई।

(iv)   आसियान एवं दक्षिण कोरिया के बीच 17वीं शिखर बैठक संपन्न हुई।

(v)   आसियान और भारत के बीच 12वीं शिखर बैठक संपन्न हुई।

(vi)   आसियान एवं अमेरिका के बीच द्वितीय शिखर बैठक संपन्न हुई।

(vii)  9वीं पूर्वी एशियाई शिखर बैठक के अवसर पर अध्यक्ष का वक्तव्य जारी किया गया।

(viii) 6ठीं आसियान-संयुक्त राष्ट्र शिखर बैठक के अवसर पर अध्यक्ष का वक्तव्य जारी किया गया।

(ix)   आसियान समुदाय के ‘वर्ष 2015 के पश्चात का नाय पी ताव घोषणा-पत्र’’ जारी किया गया।

(x)   आसियान सचिवालय को मजबूत बनाने और आसियान के अंगों की समीक्षा की घोषणा की गई।

(xi)   वन्य जीव तस्करी से निपटने के लिए पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में वक्तव्य जारी किया गया।

(xii)  आतंकवाद और अंतर्राष्ट्रीय अपराध का मुकाबला करने के लिए आसियान-जापान द्वारा संयुक्त घोषणा-पत्र जारी किया गया।

(xiii) जलवायु परिवर्तन-2014 पर आसियान-अमेरिका संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया।

(xiv) इबोला विषाणु द्वारा फैल रहे रोग के विरुद्ध 9वां घोषणा-पत्र जारी किया गया।

भारतीय दृष्टिकोण के अनुसार पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन तथा भारत-आसियान शिखर सम्मेलन अत्यंत सफल रहा।

9वां पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS)

9वां पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन 13 नवंबर, 2014 को म्यांमार की राजधानी नाय पी ताव में म्यांमार के राष्ट्रपति यू थीन सिएन (U Thein Sein) की अध्यक्षता में संपन्न हुआ जिसमें आसियान के सदस्य देशों के साथ ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया, रूस और अमेरिका के राष्ट्राध्यक्षों/शासनाध्यक्षों ने भाग लिया।

इस सम्मेलन के उपरांत 50 बिंदुओं वाला चेयरमैन स्टेटमेंट जारी किया गया। चेयरमैन स्टेटमेंट में ईएएस की स्थापना पर जारी क्वालालम्पुर घोषणा (2005), ईएएस की 5वीं वर्षगांठ पर जारी हनोई घोषणा (2010), आपसी संबंधों के सिद्धांतों पर ईएएस के सिद्धांतों के प्रति वचनबद्धता दोहराई गई।

चेयरमैन स्टेटमेंट में ऊर्जा, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन, शिक्षा एवं जन-दर-जन संपर्क, वैश्विक स्वास्थ्य एवं वैश्विक बीमारियों, वित्त, आपसी सहयोग संपर्क, व्यापार एवं अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा, सामूहिक सुरक्षा एवं सहयोग, गैर- परंपरागत सुरक्षा एवं अप्रसार, सहयोग के अन्य क्षेत्रों तथा विभिन्न क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की गई।

पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में इराक एवं सीरिया में आतंकी/अतिवादी संगठनों द्वारा हिंसा एवं बर्बरता में वृद्धि पर विशेष वक्तव्य जारी किया गया, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय कानून एवं संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसरण में हिंसा एवं बर्बरता पर रोक लगाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ काम करने की प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

उपरोक्त बिंदुओं के अतिरिक्त इबोला वायरस से बीमारी के फैलने पर क्षेत्रीय प्रत्युत्तर के संबंध में एक 16 बिंदुओं का संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया।

12वां भारत-आसियान शिखर सम्मेलन

12वां भारत-आसियान शिखर सम्मेलन 12 नवंबर, 2014 को नाय पी ताव (म्यांमार) में संपन्न हुआ, जिसकी अध्यक्षता म्यांमार संघ गणराज्य के राष्ट्रपति यू थीन सिएन ने की। इस शिखर बैठक में आसियान के सदस्य देशों के सभी शासनाध्यक्षों एवं राष्ट्राध्यक्षों तथा भारत के प्रधानमंत्री ने भाग लिया।

12वीं भारत-आसियान शिखर बैठक के अवसर पर जारी अध्यक्षीय वक्तव्य में 24 बिंदु समाहित किए गए थे जिनमें क्षेत्रीय शांति, स्थिरता एवं सुरक्षा के महत्त्व को रेखांकित किया गया और भारत-आसियान संयुक्त घोषणा, 2013 के कार्यान्वयन में सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

आसियान नेताओं द्वारा 27-28 अगस्त, 2014 को दनांग, वियतनाम में तीसरे विस्तारित आसियान समुद्री मंच (ईएएमएफ) में भारत की भागीदारी का स्वागत किया गया और समुद्री सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए सहमति व्यक्त की गई।

अध्यक्षीय वक्तव्य में भारत-आसियान के बीच कुल व्यापार वर्ष 2013 में 67.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर पहुंचने पर संतोष व्यक्त किया गया तथा वर्ष 2015 तक 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।

आसियान नेताओं ने भारत की ‘पूरब की ओर देखो नीति (Look East Policy)’ में ‘पूरब में काम करो’ नीति पर बल दिए जाने का स्वागत किया तथा भारत की इस नवीन नीति में यह विश्वास व्यक्त किया कि यह नीति आसियान-भारत नागरिक साझेदारी में विशेष रूप से आसियान समुदाय निर्मित करने की प्रक्रिया एवं आसियान की केंद्रीय भूमिका में सहायता प्रदान करने में योगदान करेगी।

आसियान नेताओं ने वर्ष 2014 से भारत और म्यांमार के बीच पोत परिवहन की सीधी सेवा प्रारंभ करने के लिए भारत का विशेष स्वागत किया, जो भारत और आसियान के मध्य संयोजकता में वृद्धि करेगी। नेताओं ने मलेशिया में वर्ष 2015 में आयोजित होने वाले भारत-आसियान थिंक टैंक नेटवर्क के चौथे गोलमेज सम्मेलन के प्रति शुभेच्छा व्यक्त की।

12वें भारत-आसियान शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री का उद्बोधन

इस शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और आसियान जनसंख्या के मामले में क्रमशः द्वितीय और तृतीय स्थान पर हैं और हम विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के साथ सबसे तेजी से उभरती तीन अर्थव्यस्थाओं में शामिल हैं। भारत के पास एक युवा जनसंख्या की शक्ति है जिसमें 35 वर्ष की आयु के 800 मिलियन लोग एक बड़े अवसर का सृजन करते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और आसियान नवीकरण ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में साथ काम कर सकते हैं तथा विनिर्माण, अनुसंधान और परिनियोजन (Deployment) के लिए एक प्रमुख आसियान-भारत सौर परियोजना के बारे में विचार कर सकते हैं। अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत और आसियान सहयोगी हो सकते हैं और वियतनाम में नए-भारत आसियान अंतरिक्ष संबंधित भू-स्टेशन की स्थापना शीघ्रता से करनी चाहिए और इंडोनेशिया में मौजूद स्टेशन के उन्नयन की परियोजना प्रारंभ करनी चाहिए। आपदा प्रबंध में त्वरित प्रतिक्रिया प्रबंधन में भी हम सहयोगी हो सकते हैं। हमें एक दूसरे का सहयोग करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दक्षिण चीन सागर में शांति एवं स्थिरता के लिए प्रत्येक राष्ट्र को अंतर्राष्ट्रीय मानकों और नियमों का पालन करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने यह आशा व्यक्त की आसियान देश इस संबंध में वर्ष 2002 के घोषणा-पत्र के दिशा-निर्देशों को सफलतापूर्वक लागू करेंगे। उल्लेखनीय है कि यह घोषणा चीन सागर में आचरण एवं आचार संहिता से संबंधित है।

प्रधानमंत्री ने पारंपरिक औषधि, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण तथा वन सहित स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने पर बल दिया और आपसी सहयोग कृषि एवं खाद्य सुरक्षा तथा अनुसंधान में अपार संभावनाओं की ओर संकेत किया।

अंत में प्रधानमंत्री ने भारत-आसियान संबंधों की सुदृढ़ता और निरंतरता पर ध्यान देने का संकल्प व्यक्त किया जिससे आसियान और भारत एक- दूसरे की उच्च अपेक्षाओं को पूरा कर सकें।

भारत-आसियान संबंधों की पृष्ठभूमि

दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र म्यांमार, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, लाओस एवं कंबोडिया आदि ऐतिहासिक रूप से भारतीय विचारों, धर्म, कला तथा संस्कृति से प्रभावित रहे हैं। इन राष्ट्रों के साथ भारत की सांस्कृतिक समानता, इनके साथ भारत के घनिष्ठ आर्थिक सहयोग एवं प्रगाढ़ संबंधों के लिए व्यापक आधार प्रदान करती है।

वर्ष 1967 में आसियान की स्थापना को साम्यवाद विरोधी संगठन के रूप में देखा गया। वर्ष 1991 में सोवियत संघ के विघटन एवं शीतयुद्ध की समाप्ति ने भारत समेत एशियाई राष्ट्रों की कूटनीति में व्यापक बदलाव किया। वर्ष 1991 में घोषित भारत की ‘लुक ईस्ट पॉलिसी’ (पूर्व की ओर देखो नीति) तथा वर्ष 1997 में आसियान द्वारा बाहरी रिश्तों के संबंध में घोषित ‘आसियान दृष्टिकोण, 2020’ की नीति ने भारत-आसियान रिश्तों को मजबूत करने हेतु नया आयाम प्रदान किया।

भारत को वर्ष 1992 में आसियान का क्षेत्रीय वार्ता साझेदार (सेक्टोरल डायलॉग पार्टनर) बनाया गया तथा वर्ष 1995 में इसे पूर्ण वार्ता साझेदार (फुल डायलॉग पार्टनर) का दर्जा दिया गया। वर्ष 1996 में भारत को आसियान के अनुषंगी संगठन ‘आसियान क्षेत्रीय मंच’ (ASEAN Regional Forum) की सदस्यता प्रदान की गई और वर्ष 2002 में भारत एवं आसियान के बीच वार्षिक शिखर बैठकों का आयोजन प्रारंभ हुआ।

वर्ष 2002 से भारत-आसियान संबंधों में निरंतर प्रगाढ़ता आई है और भारत ने आसियान राष्ट्रों को पहचान लिया है और अब इन्हें ‘कोका कोला कंट्रीज’ मात्र नहीं माना जाता।

भारत एवं आसियान के बीच द्विपक्षीय व्यापार में भी उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है। वर्ष 1993-2003 की अवधि में भारत-आसियान द्विपक्षीय व्यापार 11.22 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा। वर्ष 2003 में भारत-आसियान द्विपक्षीय व्यापार 12.1 बिलियन डॉलर था जो वर्ष 2008 में बढ़कर 48 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। अगस्त, 2009 में भारत एवं आसियान के बीच संपन्न माल समझौता, भारत-आसियान क्षेत्रीय व्यापार एवं निवेश को बढ़ाने के उद्देश्य से पहला बड़ा कदम था। वर्ष 2012 में भारत-आसियान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 79.3 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया तथा इसने 70 बिलियन डॉलर के लक्ष्य को पार कर लिया। पर वर्ष 2013 में भारत और आसियान के बीच कुल व्यापार में गिरावट देखी गई तथा यह 67.9 बिलियन डॉलर पहुंच गया। वर्ष 2015 तक दोनों पक्ष आपसी व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लिए लक्ष्य-बद्ध हैं। आज आसियान, भारत का यूरोपीय संघ, अमेरिका एवं चीन के पश्चात चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है।

भारत, आसियान का सातवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार एवं आसियान में छठां सबसे बड़ा निवेशक है।

इस प्रकार आसियान के साथ भारत का बढ़ता सहयोग, भारत की ‘पूर्व की ओर देखो नीति’ का ही सुखद परिणाम है।

भारत-आसियान आपसी संबंधों की एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि दोनों पक्षों के बीच बैंकॉक में 13 अगस्त, 2009 को हुआ भारत-आसियान मुक्त व्यापार समझौता (FTA) है जो कि 1 जनवरी, 2010 से लागू हो गया। इस समझौते में आपसी व्यापार की लगभग 80 प्रतिशत वस्तुओं (कुल 400) पर व्यापार शुल्क न्यूनतम स्तर पर करने पर सहमति हुई। समझौते के प्रथम चरण में वर्ष 2013 तक 3200 वस्तुओं तथा वर्ष 2016 तक शेष 800 वस्तुओं पर व्यापार शुल्क न्यूनतम किया जाएगा।

पूंजी निवेश एवं उपभोक्ता बाजार के दृष्टिकोण से भारत एवं आसियान एक-दूसरे के लिए लाभप्रद हैं। सिंगापुर, मलेशिया एवं इंडोनेशिया आसियान क्षेत्र के अंतर्गत भारत के 3 सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं किंतु आसियान के अपेक्षाकृत अल्पविकसित राष्ट्रों (कंबोडिया, लाओस, म्यांमार एवं वियतनाम-CLMV) के साथ व्यापारिक संबंधों में कुछ जटिलताएं भी हैं। चीन, जापान एवं दक्षिण कोरिया की तुलना में भारत का आसियान के साथ व्यापार काफी कम है जिसे बढ़ाने की जरूरत है।

वर्ष 2015 तक भारत-आसियान द्विपक्षीय व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और वर्ष 2022 तक इसे 200 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

आसियान : प्रमुख तथ्य

‘एसोसिएशन ऑफ साउथ-ईस्ट एशियन नेशंस’ (ASEAN) की स्थापना 8 अगस्त, 1967 को बैंकॉक में हुई थी।

इसके पांच संस्थापक सदस्य थे-इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, फिलीपींस एवं थाईलैंड।

 वर्ष 1984 में ब्रुनेई दारूस्सलाम, 1995 में वियतनाम, 1997 में म्यांमार एवं लाओस तथा 1999 में कंबोडिया के सदस्य बनने पर आसियान के सदस्य राष्ट्रों की संख्या बढ़कर 10 हो गई।

 आसियान का मुख्यालय जकार्ता (इंडोनेशिया) में है। इसके वर्तमान महासचिव वियतनाम के ली लुआंग मिन्ह (Lee Luong Minh) हैं।

 ‘आसियान दिवस’ 8 अगस्त को मनाया जाता है।

 ‘आसियान प्लस थ्री’ (APT) में 3 राष्ट्र हैं-चीन, जापान, दक्षिण कोरिया।

आसियान के 11 वार्ताकार राष्ट्र एवं संगठन हैं-ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चीन, यूरोपीय संघ, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड, रूस, अमेरिका एवं संयुक्त राष्ट्र (UNDP)।

‘आसियान रीजनल फोरम’ (ARF) की स्थापना वर्ष 1994 में हुई थी। इसके सदस्य है-10 आसियान राष्ट्र +11 वार्ताकार राष्ट्र। संगठन+बांग्लादेश, उत्तर कोरिया, मंगोलिया, पाकिस्तान, पापुआ न्यू गिनी तथा तिमोर लेस्ते।

आसियान चार्टर पर 20 नवंबर, 2007 को सिंगापुर में हस्ताक्षर हुए थे। यह चार्टर 15 दिसंबर, 2008 से लागू हो गया है।

आसियान चार्टर में शिखर सम्मेलन को वर्ष में दो बार आयोजित करने का प्रावधान है।

आसियान की आगामी शिखर बैठक वर्ष 2015 में मलेशिया में प्रस्तावित है।

आसियान राष्ट्रों पर चीन के प्रभाव के व्यापक प्रभाव के बावजूद भारत-आसियान संबंधों में प्रगाढ़ता आई है। विकासशील राष्ट्रों के बीच द्विपक्षीय एवं क्षेत्रीय संबंध सशक्त होने पर ही एक ध्रुवीय विश्व-व्यवस्था को चुनौती दी जा सकती है। एशियाई राष्ट्रों में आपसी एवं क्षेत्रीय सहयोग तथा समन्वित सोच से 21वीं सदी को ‘एशिया की सदी’ बनाया जा सकता है।

वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की ‘पूरब की ओर देखो नीति ‘पूरब में काम करो’ की अग्र-सक्रिय नीति में परिवर्तित हो गई है जिसमें दैदीप्यमान एशिया के दो प्रगति ध्रुवों के बीच सभी के लिए समान रूप से लागू त्वरित सहभागिता की परिकल्पना की गई है। दक्षिण चीन सागर में असंतोष की पृष्ठभूमि में भारत ने समुद्र में आवागमन की स्वतंत्रता पर लगातार बल दिया है और सभी तटीय क्षेत्रों के विवादों का संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून के अनुसार निपटारा करने पर सभी का ध्यान केंद्रित किया है।

भारत और आसियान के बहुरंगी संबंध इस शताब्दी को एशियाई शताब्दी बनाने के स्वप्न को साकार करने के मार्ग पर संतोषजनक रूप से अग्रसर हैं। भारत-आसियान इस पूरे क्षेत्र में शांति और समृद्धि का विस्तार करते हुए एशिया के पुनर्जागरण की नई कहानी लिखने के लिए कृत-संकल्प दिख रहे हैं।