आईएनएस अरिहंत नौसेना में शामिल

I N S Arihant Indian boat join forces
  • क्या है?
  • आईएनएस अरिहंत भारत की पहली स्वदेश निर्मित परमाणु पनडुब्बी है।
  • कब हुई शामिल?
  • रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, अगस्त, 2016 में नौसेना अध्यक्ष एडमिरल सुनील लनबा ने आईएनएस अरिहंत को औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना में शामिल किया।
  • विशेषताएं
  • 6000 टन वजनी आईएनएस अरिहंत 83 मेगावॉट के दाबित हल्के जल परमाणु रिएक्टर द्वारा संचालित है।
  • आईएनएस अरिहंत की लंबाई 110 मीटर और चौड़ाई 11 मीटर है।
  • यह 12 की संख्या में K-15 (सागरिका) मिसाइल या 4 की संख्या में K-4 मिसाइल और 6 की संख्या में 21 इंच के टॉरपीडो ट्यूब्स को वहन कर सकती है।
  • INS अरिहंत USHUS और पंचेंद्रिय नामक अत्याधुनिक सोनार प्रणाली से लैस है।
  • इसके कार्मिक मंडल में 23 अधिकारी एवं 72 नाविक शामिल हैं।
  • जुलाई, 2009 में विशाखापत्तनम में आईएनएस अरिहंत का जलावतरण किया गया था।
  • अगस्त, 2013 में आईएनएस अरिहंत का परमाणु रिएक्टर सक्रिय किया गया था।
  • आईएनएस अरिहंत का निर्माण ‘उन्नत प्रौद्योगिकी पोत’ (ATV) के छद्म नाम से किया गया था।
  • मार्च, 2016 में आईएनएस अरिहंत से K-4 मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया था।
  • भारत को लाभ
  • थल और आकाश के बाद जल के भीतर से परमाणु वार करने की ‘परमाणु त्रयी’ (Nuclear Triad) क्षमता हासिल करने वाला भारत विश्व का छठां देश है।
  • पांच अन्य देश हैं-अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस।
  • आईएनएस अरिहंत भारत को ‘द्वितीय प्रहार क्षमता’ (परमाणु हमला होने पर पलटवार करने की क्षमता) प्रदान करती है क्योंकि भारत अपने परमाणु सिद्धांत में ‘पहले प्रयोग न करने’ (No-First-Use) की नीति के प्रति प्रतिबद्ध है।
  • द्वितीय परमाणु पनडुब्बी : आईएनएस अरिदमन
  • आईएनएस अरिदमन भारत द्वारा विकसित की जा रही अरिहंत वर्ग की द्वितीय स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी है।
  • इसका निर्माण ‘उन्नत प्रौद्योगिकी पोत’ (ATV) परियोजना के तहत विशाखापत्तनम में किया जा रहा है।
  • यह 24 की संख्या में K-15 (सागरिका) मिसाइल या 8 की संख्या में K-4 मिसाइल वहन कर सकती है।
  • इसकी अधिकतम गति जल की सतह पर 12-15 नॉट और जल के भीतर 24 नॉट होगी।
  • इसे वर्ष 2018 के अंत तक नौसेना में शामिल किए जाने का अनुमान है।

लेखक- नीरज ओझा