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अवसर का एक नया युग

(स्रोत : द टाइम्स ऑफ इंडिया :19 दिसंबर, 2015)

मूल लेखक- बान की-मून

70 वर्ष पहले द्वितीय विश्व युद्ध के अवशेषों से संयुक्त राष्ट्र का निर्माण हुआ था। सात दशकों बाद पेरिस में एक अन्य चुनौती के समक्ष राष्ट्र संगठित हुए हैं। यह चुनौती है जीवन की, जैसा कि हम जानते हैं यह तेजी से गर्म होते हुए ग्रह के कारण है।
मानवता के सामने उपस्थित समस्याओं में से एक जटिलतम समस्या जलवायु परिवर्तन पर भूमंडलीय सहयोग हेतु सरकारों ने नए युग में प्रवेश किया है। ऐसा करते हुए उन्होंने आगे की पीढ़ियों की रक्षा के लिए हमारे ‘चार्टर मेंडेट’ के समर्थन में प्रयासों को महत्त्वपूर्ण रूप से आगे बढ़ाया है। पेरिस समझौता लोगों की, पर्यावरण की और एक बहुपक्षीय विजय है। यह ग्रह के लिए एक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी है। पहली बार विश्व के प्रत्येक देश ने उत्सर्जन को घटाने, कमी में मजबूती लाने तथा मौसम परिवर्तन को घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अभिव्यक्त करने का प्रण किया है।
एक साथ देश सहमत हुए कि मौसम परिवर्तन के संकट को कम करने में, सामान्य भले को बनाए रखने से राष्ट्रीय हित बेहतर रूप से संरक्षित होते हैं। मैं विश्वास करता हूं यह उदाहरण, राजनैतिक एजेंडे से परे जाकर, पालन किया जा सकता है। पेरिस विजय इस विलक्षण वर्ष की अंतिम घटना रही। ‘आपदा संकट में कमी’ के सेंडाई कार्य ढांचे से लेकर विकास के लिए वित्त प्रबंध पर अदिस अबाबा क्रिया एजेंडा, न्यूयॉर्क में स्थिर विकास सम्मेलन से लेकर पेरिस में मौसम परिवर्तन वार्ता, यह एक ऐसा वर्ष रहा है जिसमें संयुक्त राष्ट्र ने विश्व को अपनी, आशा तथा निदान प्रस्तुत करने की, योग्यता सिद्ध की है।
ऑफिस में अपने प्रथम दिनों के समय से ही मैंने कहा था कि मौसम परिवर्तन हमारे समय की एक बड़ी चुनौती है। यही कारण है कि मैंने इसे अपने कार्यकाल की शीर्ष वरीयता बनाया है, मैंने विश्व के लगभग सभी नेताओं से कहा है कि मौसम परिवर्तन की चुनौती हमारे अर्थतंत्र, हमारी सुरक्षा और हमारे अस्तित्व के लिए खतरा है। मैं विश्व के प्रत्येक महाद्वीप में गया और मौसम की धार पर रहने वाले समुदायों से मिला।
मैं कष्टों को देख कर विचलित हो गया और निदानों के लिए प्रेरणा ली जो हमारे संसार को सुरक्षित और अधिक संपन्न बनाएंगे।
मैंने संयुक्त राष्ट्र के प्रत्येक मौसम सम्मेलन में भाग लिया है। मेरे द्वारा आयोजित तीन मौसम सम्मेलनों से राजनैतिक इच्छाशक्ति गतिशील हुई, सरकारों व्यवसाय जगत तथा जन-समुदाय के द्वारा नवीन क्रियाओं को उत्प्रेरणा मिली। पिछले वर्ष के मौसम सम्मेलन में किए गए वादों के साथ-साथ पेरिस क्रिया एजेंडा, दिखाता है कि हल वहां है।
जो कभी सोचने योग्य नहीं था, वह अब रोकने योग्य नहीं है। निजी क्षेत्र पहले ही न्यून उत्सर्जन भविष्य में लागत लगा रहा है। हल अधिकाधिक सस्ते और उपलब्ध हैं और बहुत से, विशेषकर पेरिस सम्मेलन की सफलता के बाद, आने को तैयार हैं।
पेरिस समझौते में मेरे द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं पर चर्चा हुई। बाजारों को अब यह स्पष्ट संकेत है कि उन्हें अपनी लागत के अनुमापन की आवश्यकता है जो न्यून उत्सर्जन तथा स्थिर मौसम विकास उत्पन्न करेगा। सभी देश भूमंडलीय तापमान बढ़ोत्तरी को 2oC के नीचे सीमित रखने पर राजी हुए तथा घोर संकट को देखते हुए 1.5oC के लिए प्रयास करेंगे। यह अफ्रीकी देशों, छोटे विकासशील द्वीपीय देशों एवं निम्नतर-विकसित देशों के लिए अति महत्त्वपूर्ण है।
पेरिस में सभी देश जल्द से जल्द इस सदी के अर्द्धशताब्दी में भूमंडलीय ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन पर लगाम लगाने के दीर्घकालीन लक्ष्य पर सहमत हुए। 188 देशों ने अब राष्ट्रीय रूप से इच्छित अपने सहयोगों को प्रस्तुत किया जो यह दिखाएगा कि वे उत्सर्जन को कम करने और मौसम की नियमितता के लिए क्या करने को तैयार हैं। वर्तमान में इन राष्ट्रीय लक्ष्यों ने पहले ही उत्सर्जन वक्र को महत्त्वपूर्ण रूप से नीचे की ओर झुका दिया है लेकिन सामूहिक रूप में उन्होंने अभी भी हमें 3oC की खतरनाक अमान्य तापवृद्धि के साथ छोड़ा हुआ है। यही कारण है कि देशों ने पेरिस में प्रण किया कि वे अपनी राष्ट्रीय मौसम योजनाओं का वर्ष 2018 से प्रत्येक पांच वर्ष में पुनरावलोकन करेंगे। यह उन्हें विज्ञान की आवश्यकता के अनुसार, अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के उन्नयन में सहायक होगा।
पेरिस समझौता विकासशील, विशेषकर गरीबतम और कमजोर देशों के लिए पर्याप्त, संतुलित अनुकूलन एवं स्थिर सहयोग भी सुनिश्चित करता है और यह मौसम परिवर्तन से होने वाली हानि तथा क्षति को कम करने एवं अभिव्यक्त करने के वैश्विक प्रयासों में सहायता करेगा।
सरकारें सशक्त पारदर्शी नियमों के निर्माण हेतु सहमत हुईं जो यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी देश वही करेंगे जो उन्होंने करने के लिए कहा है।
विकसित देश क्षमता, निर्माण और तकनीक अनुमापन में सहायता प्रदान करने और अर्थ के एकत्रीकरण में नेतृत्व करने हेतु राजी हुए और विकासशील देशों ने अपनी क्षमतानुसार मौसम परिवर्तन को अभिव्यक्त करने में अपनी बढ़ती जिम्मेदारी को मान लिया।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि को संज्ञान में लेते हुए, यह मेरी दुर्बलता होगी यदि मैंने व्यावसायिक जगत तथा आम जनता के नेतृत्व एवं दृष्टि को नहीं पहचाना। उन्होंने सिद्धांतों एवं समाधानों को प्रकाशित किया है। मैं उन्हें विलक्षण मौसम नागरिकता के प्रदर्शन के लिए सलाम करता हूं।
अब जबकि पेरिस समझौता सामने है हमारे विचारों को इसे तुरंत लागू करने के प्रति मुड़ना चाहिए। मौसम परिवर्तन को अभिव्यक्त करके हम वर्ष 2030 के स्थिर विकास के एजेंडे के लिए बढ़ रहे हैं। पेरिस समझौते के आशाजनक परिणाम सभी स्वीकार्य विकास लक्ष्यों के लिए हैं। हम विकास के नए युग के अवसर में प्रवेश करने के लिए तैयार हैं।
अब जबकि सरकारों, व्यवसाय जगत, आम जनता ने मौसम परिवर्तन के हल तथा धारण करने योग्य विकास के लक्ष्यों को महसूस किया है, तो संयुक्त राष्ट्र सभी सदस्य देशों तथा बड़े अर्थ में समाज की प्रत्येक स्तर पर सहायता करेगा और प्रथम चरण के रूप में पेरिस समझौते को लागू करने के लिए समझौते में किए गए आग्रह के अनुसार न्यूयॉर्क में अगले वर्ष 22 अप्रैल को एक उच्च स्तरीय हस्ताक्षर अभियान आयोजित करवाऊंगा
मैं सहायता तथा गति प्रदान करने के लिए आगे आने हेतु विश्व के नेताओं को आमंत्रित करूंगा और एक साथ कार्य करके हम गरीबी अंत करने के अपने साझा उद्देश्य को प्राप्त कर सकते हैं, शांति की स्थापना कर सकते हैं तथा प्रत्येक के जीवन में सम्मान और अवसर को सुनिश्चित कर सकते हैं।

अनुवादक
राजेश त्रिपाठी