अमेरिकी क्षेत्र खसरा मुक्त घोषित

The US declared the area free measles

महामारियों व बीमारियों से मनुष्य के संग्राम का सफर सनातन काल से चला आ रहा है। रोगाणुओं से युद्ध में समय-समय पर मानव ने कई सफलताएं अर्जित की हैं। अमेरिकी क्षेत्र में खसरा से मुक्ति, इसी युद्ध शृंखला की एक कड़ी है।

  • 22 वर्षों के टीकाकरण के अथक प्रयासों के फलस्वरूप, अमेरिकी क्षेत्र अब पहला ऐसा क्षेत्र बन गया है, जिसे सितंबर, 2016 में खसरा मुक्त क्षेत्र घोषित कर दिया गया है।
  • अमेरिकी क्षेत्र में चेचक, पोलियो, रुबेला और जन्मजात रुबेला सिंड्रोम के बाद, खसरा पांचवां ऐसा रोग है, जिसका उन्मूलन किया जा चुका है।
  • खसरा सबसे संक्रामक रोगों में से एक है क्योंकि यह कुपोषित बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम कर देता है, अतः न्यूमोनिया, डायरिया इत्यादि बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं।
  • विश्व में प्रतिदिन 315 बच्चे खसरा संक्रमण से काल कवलित हो जाते हैं।
  • विकासशील देशों के कुपोषित बच्चों में खसरा मुख्य जानलेवा बीमारी है। इससे बचने के लिए खसरा वैक्सीन की दो खुराक (डोज़) दी जाती है।
  • अखिल भारतीय स्तर पर भारत में खसरा वैक्सीन की पहली खुराक वर्ष 1985 में आरंभ की गई थी। दूसरी खुराक वर्ष 2010 में आरंभ की गई थी। आज पूरे देश में नियमित टीकाकरण (Routine Immunisation) के तहत खसरा वैक्सीन की दो खुराक दी जा रही है।
  • उल्लेखनीय है कि लाइव एटीनूएटेड (Live Attenuated) वैक्सीन [जो कि जीवित विषाणुओं द्वारा बनाई जाती है ]द्वारा खसरा को नियंत्रित किया जाता है।
  • खसरा एक वायरल रोग है, जिससे श्वसन तंत्र में संक्रमण होता है, जिसके फलस्वरूप न्यूमोनिया, मस्तिष्क में सूजन और यहां तक कि मृत्यु हो सकती है।
  • खसरा के विषाणु की जाति को मॉर्बिली वायरस (Morbilli Virus) के नाम से जाना जाता है तथा यह पैरामिक्सिडोवाइरिडी फैमिली (कुल) से संबंधित है।
  • इसमें एकसूत्रीय आर.एन.ए. (Ss RNA) पाया जाता है। खसरा को एंटी-बायोटिक्स द्वारा ठीक नहीं किया जा सकता है क्योंकि एंटीबायोटिक्स विषाणुओं पर प्रभावहीन होते हैं।
  • खसरा संक्रमित व्यक्तियों के नाक, मुंह और गले के स्राव के सीधे संपर्क में आने से या संक्रमित एयर ड्राप्लेट्स (वायवीय संक्रमणकारी नमी) के द्वारा फैलता है।
  • इसके प्रमुख लक्षण हैं-तेज बुखार, पूरे शरीर में सामान्यीकृत लाल चकत्ते, भरी हुई नाक और लाल आंखे।
  • खसरा के लिए MMR वैक्सीन का प्रयोग किया जाता है MMR वैक्सीन को मीसल्स (खसरा), मम्स (कंठमाला) व रुबेला से लड़ने हेतु विकसित किया गया है।
    मम्स या कंठमाला एक विषाणुजनित रोग है, जिसमें पैरोटिड ग्रंथि कष्टदायक रूप से बड़ी हो जाती है।
  • ध्यातव्य है कि 27 मार्च, 2014 को भारत को पोलियो मुक्त देश घोषित कर दिया गया। पोलियो एक विषाणुजनित रोग है। किसी भी देश अथवा क्षेत्र को पोलियो मुक्त घोषित करने की यह शर्त होती है कि उसमें पिछले तीन वर्षों से देशी प्रजाति के वायरस के द्वारा संक्रमण का एक भी मामला प्रकाश में न आया हो।
  • ध्यातव्य है कि अप्रैल, 1977 में भारत को चेचक मुक्त तथा फरवरी, 2000 में गिनी वर्म रोग मुक्त देश घोषित किया गया था।
  • उल्लेखनीय है कि जब कोई रोग किसी विशेष क्षेत्र या जनसंख्या में स्थायी रूप से विद्यमान रहता है, तो ऐसी स्थिति ‘एनडेमिक’ कहलाती है।
श्रीलंका मलेरिया मुक्त राष्ट्र घोषित

  • 5 सितंबर, 2016 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने श्रीलंका को मलेरिया मुक्त राष्ट्र घोषित कर दिया।
  • दक्षिण-पूर्व एशिया में मालदीव के बाद श्रीलंका  दूसरा ऐसा देश है जिसे मलेरिया मुक्त घोषित किया गया है।
  • मलेरिया उन्मूलन हेतु राष्ट्रीय संरचना (National Framework for Malaria Elumination) 2016-17 के अनुसार, वर्ष 2030 तक भारत से मलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य रखा गया है।
  • ध्यातव्य है कि मलेरिया मादा एनाफिलिज (Female Anopheles) मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर रात के समय सक्रिय रहता है।
  • मलेरिया में यकृत, प्लीहा इत्यादि संक्रमित होते हैं, जो प्लाज्मोडियम (Plasmodium) नामक परजीवी के संक्रमण के कारण होता है। यह परजीवी एक प्रोटोजोअन (Protozoan) है। मलेरिया फैलाने वाली एनॉफिलिज मच्छर जब संक्रमित व्यक्ति का खून चूसती है तथा पुनः जब दूसरे व्यक्ति को काटती है, तो यह परजीवी एक व्यक्ति के रक्त परिसंचरण तंत्र से दूसरे व्यक्ति के रक्त परिसंचरण तंत्र में प्रवाहित हो जाता है।
  • मलेरिया के उपचार हेतु एटाब्रिन क्लोरोक्वीन, प्राइमाक्वीन कामाक्विन इत्यादि औषधियों को लेना चाहिए। क्लोरोक्विन (Chloroquin) सिनकोना नामक पौधे की छाल (Bark) से प्राप्त की जाती है।
  • इसके अतिरिक्त आर्टिमिसिनिन आधारित संयुक्त चिकित्सा (Artemisinin Based Combination Therapy)  [Artemether + Lumefantrine,] द्वारा भी मलेरिया की चिकित्सा की जाती है।
  • उल्लेखनीय है कि प्लाज्मोडियम (Plas-modium) नामक प्रोटोजोआ एक दिपोषदीय (Digenetic) परजीवी है।
  • मनुष्य को प्लाज्मोडियम का मुख्य पोषद या प्राथमिक पोषद माना जाता है तथा मच्छर को द्वितीयक पोषद माना जाता है, परंतु डॉ. एस.के. शर्मा के अनुसार, क्योंकि मच्छर में प्लाज्मोडियम के जीवन चक्र की लैंगिक जनन वाली अवस्था तथा मनुष्य में अलैंगिक जनन वाली अवस्था पाई जाती है, अतः मच्छर प्राथमिक पोषद व मनुष्य द्वितीयक पोषद है।
  • सर रोनाल्ड रॉस ने इस बात का पता लगाया कि प्लाज्मोडियम परजीवी से ही मलेरिया रोग होता है।
  • गैम्बूसिया व गप्पी (Guppy) मछली, मच्छर के लार्वा को खाती है। अतः मच्छरों के जैविक नियंत्रण हेतु इनका उपयोग किया जाता है।

लेखक-गोपाल कृष्ण पांडेय