अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना

Establishment of South Asia Regional Center of International Rice Research Institute

भारत में आज भी लगभग 55 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या के लिए कृषि जीविकोपार्जन का मुख्य साधन है। लगातार बढ़ती जनसंख्या के भरण-पोषण हेतु कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए आवश्यक है कि कृषि अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाए, जिससे उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिल सके। इसी परिप्रेक्ष्य में हाल ही में अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना को मंजूरी प्रदान की गई।

  • 12 जुलाई, 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में संपन्न मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान वाराणसी में स्थित राष्ट्रीय बीज अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र के परिसर में अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
  • इसके तहत वाराणसी में चावल में मूल्य संवर्द्धन के लिए एक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है।
  • इसमें एक आधुनिक प्रयोगशाला भी होगी, जिसमें चावल और पुआल में भारी धातुओं की गुणवत्ता और स्तर का पता लगाने की क्षमता होगी।
  • यह केंद्र चावल के विभिन्न उत्पादों की शृंखला को सशक्त बनाने के लिए हितधारकों के क्षमता विकास केंद्र के रूप में भी कार्य करेगा।
  • पूर्वी भारत में यह पहला अंतरराष्ट्रीय केंद्र होगा, जो इस क्षेत्र में सतत चावल उत्पादन और कौशल विकास के क्षेत्र में वरदान साबित होगा।
  • इसके साथ ही दक्षिण एशिया और अफ्रीकी देशों के लिए भी यह खाद्यान्न उत्पादन और कौशल विकास के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएगा।
  • यह केंद्र भारत की समृद्ध जैवविविधता का इस्तेमाल कर चावल की उन्नत किस्में विकसित करने में सहयोग करेगा।
  • इससे देश में प्रति हेक्टेयर अधिक उपज प्राप्त करने के साथ ही उनमें पोषक तत्वों में वृद्धि में भी सहायता प्राप्त होगी।
  • जिससे देश के खाद्य एवं पौष्टिक सुरक्ष की समस्या को सुलझाने में भी मदद मिलेगी।
  • यह उपज के नुकसान को कम करने और उपज के मूल्य संवर्द्धन के जरिए किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।
  • इससे पूर्वी भारत के किसान सबसे ज्यादा लाभान्वित होंगे साथ ही दक्षिण एशिया और अफ्रीकी देशों के किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा।
  • इस दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आईएसएआरसी) का प्रबंधन अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) के न्यासी बोर्ड द्वारा संचालित होगा।
  • आईआरआरआई के महानिदेशक की अध्यक्षता वाली समन्वय समिति, केंद्र के अध्यक्ष के तौर पर कार्य करेगी। इसके साथ ही भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय सचिव इस केंद्र के सह-अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किए जाएंगे।
  • पादप विज्ञान के महानिदेशक, कृषि अनुसंधान परिषद के निदेशक एनएसआरटीसी, आईआरआरआई के भारत में प्रतिनिधि, उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि और नेपाल, बांग्लादेश तथा निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि इसके सदस्य होंगे।
  • केंद्र की स्थापना हेतु डीएससी एंड डब्ल्यू तथा फिलीपींस के आईआरआरआई के बीच एक समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया जाएगा।
  • डीएससी एंड डब्ल्यू केंद्र में प्रयोगशाला, कार्यालय, प्रशिक्षण कक्षाओं सहित सभी आधारभूत सुविधाओं के साथ ही वाराणसी में एनएसआरटीसी में भूमि भी उपलब्ध कराएगा।
  • यह केंद्र छः महीने के भीतर काम करना शुरू कर देगा।

लेखक-प्रभाकांत शुक्ल