आयोग और घटनाचक्र के उत्तरों में भिन्नता: उत्तर प्रदेश लोअर सबार्डिनेट (प्रा. प्ररीक्षा) 2015

5.    स्मार्ट सिटीज़ मिशन में जल तथा मलजल (सीवरेज) का वित्तपोषण जिस राजस्व से होगा, वह है-
(a)    मनोरंजन-कर
(b)    चुंगी तथा प्रवेश-कर
(c)    शिक्षा-कर
(d)    सम्पत्ति-कर
उत्तर-(d)
स्मार्ट सिटीज़ मिशन में जल तथा मलजल (सीवरेज) का वित्तपोषण सम्पत्ति-कर से किया जाना प्रस्तावित है। उल्लेखनीय है कि प्रथम चरण (2015-16 से 2019-20) में 100 स्मार्ट शहर के विकास का लक्ष्य रखा गया है।

q5
Source Link : http://smartcities.gov.in/writereaddata/Financing%20of%20Smart%20Cities.pdf (P-33)
6.    निम्नलिखित में से कौन-सी भारत की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी है?
(a)    फ्लिपकार्ट    (b)    जबांग
(c)    एम-जंक्शन    (d)    भारती एयरटेल
उत्तर-(c)
वर्ष 2001 में ‘टाटा स्टील’ एवं ‘सेल’ (SAIL) के संयुक्त उद्यम (50:50) द्वारा स्थापित ई-कॉमर्स कंपनी ‘एम-जंक्शन’ भारत की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी है। ई-कॉमर्स कंपनी की सकल कारोबार (दिसंबर, 2015 तक) 3,50,000 करोड़ रुपये है। यह स्टील का ई-व्यापार करती है।
एम-जंक्शन ने अपनी  वेबसाइट पर घोषित किया है कि वह भारत की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी है। फ्लिपकार्ट अपनी वेबसाइट पर स्वयं को अग्रणी ई-कॉमर्स कंपनी बताती है न कि सबसे बड़ी। अतः निश्चित रूप से ‘एम-जंक्शन’ भारत की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी है। चूंकि उ.प्र. लोक सेवा आयोग ने इस प्रश्न का उत्तर विकल्प (a) अर्थात फ्लिपकार्ट दिया है। अतः यह उत्तर परिवर्तनीय है।
Source Link : http://www.flipkart.com/about-us
Source Link : http://mjunction.in/aboutus/overview
7.    वर्ष 2014 में विश्व के 186 देशों में मानव विकास सूचकांक में भारत का स्थान था-
(a)    138वां    (b)    135वां
(c)    134वां    (d)    130वां
उत्तर-(*)
प्रश्न में वर्णित तथ्यों के अस्पष्ट एवं त्रुटिपूर्ण होने के कारण यह प्रश्न मूल्यांकन से बाहर किए जाने योग्य है।
‘मानव विकास रिपोर्ट, 2015’ जो वर्ष 2014 के आंकड़ों पर आधारित है, के अनुसार भारत का स्थान 130वां है। इस रिपोर्ट में देशों की संख्या 188 थी।
‘मानव विकास रिपोर्ट, 2014’ जो वर्ष 2013 के आंकड़ों पर आधारित है, के अनुसार भारत का स्थान 135वां है। इस रिपोर्ट में देशों की संख्या 187 है।
(1) किसी भी रिपोर्ट में देशों की संख्या 186 नहीं है। अतः प्रश्न का यह तथ्य त्रुटिपूर्ण है।
(2) प्रश्न में यह तथ्य अस्पष्ट है कि भारत का स्थान वर्ष 2014 की रिपोर्ट के अनुसार पूछा गया है या फिर वर्ष 2014 के आंकड़ों के आधार पर। लोक सेवा आयोग ने इस प्रश्न का उत्तर मानव विकास रिपोर्ट-2015 के आधार पर ‘130वां’  दिया है।

q7a

q7
Source link : http://hdr.undp.org/sites/default/files/2015_human_development_report.pdf (page no-210)
Spirce link : http://hdr.undp.org/sites/all/themes/hdr_theme/country-notes/IND.pdf
41.      भारत के राष्ट्रपति को निलंबित की शक्ति प्राप्त है-
(a)    मौलिक अधिकारों को
(b)    अनुच्छेद 21 में वर्णित मौलिक अधिकारों को
(c)    अनुच्छेद 21-A में वर्णित मौलिक अधिकारों को
(d)    अनुच्छेद 19 में वर्णित मौलिक अधिकारों को
उत्तर-(*)
अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल की घोषणा होने पर अनुच्छेद 358 के तहत अनुच्छेद 19 में वर्णित मूल अधिकार स्वतः ही निलंबित हो जाते हैं। जबकि अन्य मूल अधिकारों (अनुच्छेद 20 एवं 21 को छोड़कर-44वां संविधान संशोधन) को निलंबित करने की शक्ति राष्ट्रपति को अनुच्छेद 359 के तहत प्राप्त है। अनुच्छेद 20 एवं 21 के अंतर्गत प्राप्त मूल अधिकार किसी भी स्थिति में निलंबित नहीं किए जा सकते। यहां उल्लेखनीय है कि अनुच्छेद 359 के अंतर्गत मूल अधिकार निलंबित नहीं होते हैं बल्कि न्यायालयों द्वारा केवल उनके प्रवर्तन कराने का अधिकार निलंबित हो जाता है। वहीं दूसरी ओर अनुच्छेद 358 के तहत अनुच्छेद 19 में वर्णित मूल अधिकारों के स्वतः निलंबन को राष्ट्रपति के आपातकाल की शक्ति के तहत की व्याख्या किए जाने पर इस प्रश्न का उत्तर विकल्प (d) हो सकता है। दूसरी ओर अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति के आदेश पर मूलाधिकारों के निलंबन को राष्ट्रपति की शक्ति की व्याख्या के आधार पर इस प्रश्न का उत्तर (a) स्वीकार्य हो सकता है। उ.प्र. लोक सेवा आयोग द्वारा जारी उत्तर-पत्रक में इस प्रश्न का उत्तर विकल्प (d) को माना गया है।

q41
Source Link : http://www.constitution.org/cons/india/p18358.html
78.    निर्जलित व्यक्ति को नहीं पीना चाहिए-
(a)    चाय    (b)    कॉफी
(c)    समुद्री जल    (d)    अल्कोहल
उत्तर-(c)
वस्तुतः समुद्री जल के अतिरिक्त कोई भी तरल पदार्थ निर्जलित व्यक्ति में जल की कमी को दूर करने के लिए उपयुक्त होता है। चाय या कॉफी में उपस्थित कैफीन मूत्रवर्धक होता है और इसके सेवन से शरीर से जल की हानि होती है, लेकिन यह हानि चाय या कॉफी के द्वारा ग्रहण किए गए जल की तुलना में काफी कम होती है। अल्कोहल भी मूत्रवर्धक है लेकिन मानव शरीर में तरल संतुलन की स्थिति पर इसके सेवन का प्रभाव बहुत कम होता है। यहां तक कि लाइट बियर (Light Beer) जैसे एल्कोहॉलिक पेय, जिनमें अल्कोहल की मात्रा 4 प्रतिशत से कम होती है, निर्जलीकरण के निवारण हेतु प्रयुक्त किए जा सकते हैं। लेकिन समुद्री जल के साथ ऐसा नहीं है। समुद्री जल के सेवन से मानव शरीर की कोशिकाओं के निर्जलित होने का खतरा रहता है क्योंकि शरीर में अधिक सांद्रता वाले नमकीन समुद्री जल को तनु (Dilute) करने के लिए शरीर की कोशिकाओं से जल परासरण क्रिया द्वारा स्थानांतरित हो जाएगा। उ.प्र. लोक सेवा आयोग ने इस प्रश्न का उत्तर विकल्प (d) अर्थात अल्कोहल दिया है जो कि गलत है।

q78
Source Link : https://books.google.co.in/books?id=uCgRY6llQpYC&pg=PA370&dq=alcohol+is+fine+so+are+tea+and&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwiC-dKmodnKAhVjIKYKHY0UDPkQ6AEIGzAA#v=onepage&q=alcohol%20is%20fine%20so%20are%20tea%20and&f=false

117.    इनमें से किस आयुर्वेदाचार्य ने तक्षशिला विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की थी?
(a)    सुश्रुत    (b)    वाग्भट्ट
(c)    चरक    (d)    जीवक
उत्तर-(c & d)
वर्तमान पाकिस्तान के रावलपिंडी जिले में स्थित तक्षशिला प्राचीन समय में गांधार राज्य की राजधानी थी। तक्षशिला की इतिहास में प्रसिद्धि का कारण उसका ख्याति प्राप्त शिक्षा केंद्र होना था। यहां अध्ययन के लिए दूर-दूर से विद्यार्थी आते थे जिनमें राजा तथा सामान्यजन दोनों ही सम्मिलित थे। कोशल के राजा प्रसेनजित, बिम्बिसार का राजवैद्य जीवक, कनिष्क का राजवैद्य चरक, बौद्ध विद्वान वसुबंधु, चाणक्य आदि ने यहीं शिक्षा प्राप्त की थी। बौद्ध साहित्य से पता चलता है कि यह वैद्यक एवं धनुर्विद्या की शिक्षा के लिए विश्व में प्रसिद्ध था। अतः स्पष्ट है कि इस प्रश्न का उत्तर विकल्प (c) और (d) दोनों ही हो सकता है। उ.प्र. लोक सेवा आयोग ने इस प्रश्न का उत्तर विकल्प (d) दिया है। इसे परिवर्तित करके (c) एवं (d) दोनों ही किया जाना चाहिए।

q117
Source Link : https://books.google.co.in/books?id=KEAvZF4TBEcC&pg=PA187&dq=taxila+charak+jivaka+agarwal&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwj9y7SAotnKAhUmHqYKHc7JBj4Q6AEIGzAA#v=onepage&q=taxila%20charak%20jivaka%20agarwal&f=false

121.    भारत में प्रथम पुरापाषाणिक उपकरण की खोज करने वाले रॉबर्ट ब्रूस फुट थे एक
(a)    भूगर्भ-वैज्ञानिक
(b)    पुरातत्त्वविद्
(c)    पुरावनस्पतिशास्त्री
(d)    इतिहासकार
उत्तर-(a & b)
इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका के अनुसार रॉबर्ट ब्रूस फुट ब्रिटिश भूगर्भ-वैज्ञानिक और पुरातत्त्वविद् थे। जियोलॉजिकल सर्वे से संबद्ध रॉबर्ट ब्रूस फुट ने 1863 ई. में भारत में पाषाणकालीन बस्तियों के अन्वेषण की शुरुआत की। अतः स्पष्ट है कि इस प्रश्न का उत्तर विकल्प (a) और (b) दोनों ही हो सकता है।

q121

q121a
Source Link : http://faunaofindia.nic.in/PDFVolumes/memoirs/021/03/index.pdf (P-41)
Source Link : http://www.britannica.com/biography/Robert-Bruce-Foote

139. निम्नलिखित नदी डेल्टाओं में से किन पर मैंग्रोव वन पाए जाते हैं?
1. नर्मदा
2. सुवर्णरेखा
3. कृष्णा
4. गंगा
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
कूट :
(a) 1 और 3 (b) 3 और 4
(c) 2 और 4 (d) 1, 3 और 4
उत्तर-(*)
मैंग्रोव वन व को डेल्टाई, दलदली तथा ज्वारीय वन भी कहते हैं। पूर्वी तट के सात महत्त्वपूर्ण डेल्टाओं नामतः गंगा, सुवर्णरेखा, महानदी, गोदावरी, कृष्णा, पेन्नर तथा कावेरी में मैंग्रोव वन पाए जाते हैं। अतः इस प्रश्न का सही उत्तर 2, 3, 4 होना चाहिए जो कि दिए गए चारों विकल्पों में शामिल नहीं है।

q139

q139a
Source Link : http://iomenvis.nic.in/index3.aspx?sslid=152&subsublinkid=36&langid=1&mid=1

Source Link : http://www.insa.nic.in/writereaddata/UpLoadedFiles/PINSA/Vol78_2012_3_Art10_343_352.pdf

मासिक पत्रिका जनवरी 2016 पी.डी.एफ. डाउनलोड

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सतत कृषि कल्याण राष्ट्रीय सम्मेलन

Sustainable agriculture Welfare Conference

‘सतत कृषि’ से तात्पर्य ऐसे कृषि उत्पादन से है जिसमें खाद्य, पौध एवं पशु उत्पाद का उत्पादन इस प्रकार किया जाता है जिससे पर्यावरण, जन स्वास्थ्य, मानव समुदाय एवं पशु कल्याण की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। आज लोग ज्यादा से ज्यादा फसल पैदा करने के लिए हर तरफ रासायनिक खाद और कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग कर रहे हैं जो न सिर्फ भूमि की सेहत के लिए हानिकारक है बल्कि इनसे तैयार कृषि उत्पाद इंसानों और जानवरों की सेहत पर भी बुरा असर डालते हैं। इस समस्या को दूर करने का सबसे बेहतर विकल्प जैविक कृषि है। यही वजह है कि सरकार की ओर से कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए जैविक खेती को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जैविक खेती के दायरे में प्राकृतिक तरीके से तैयार चीजें होती हैं जो सेहत के लिहाज से उपयोगी होती हैं। इन्हें कृत्रिम खाद, कृत्रिम कीटनाशक या कृत्रिम हॉर्मोन के बगैर तैयार किया जाता है। कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ कृषकों के कल्याण के लिए भी सरकार प्रयासरत है जिसके लिए सरकार द्वारा फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, किसान चैनल आदि कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मृदा एवं जल जैसे संसाधनों का दक्षतापूर्ण एवं संवहनीय उपयोग, कृषि उत्पादों पर किसानों को उचित मूल्य, जोखिम प्रबंधन एवं कृषि पर जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों को कम करने, जैविक कृषि आदि विषयों पर चर्चा करने के लिए भारत के पूर्ण जैविक राज्य सिक्किम में दो दिवसीय ‘सतत कृषि’ कृषक कल्याण राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 17-18 जनवरी, 2016 को कृषि एवं कृषि कल्याण मंत्रालय ने किया। इस सम्मेलन के महत्त्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित हैं-

  • 17 जनवरी, 2016 को गंगटोक के चिंतन भवन में दो दिवसीय सतत कृषि और कृषक कल्याण पर राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया गया।
  • केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के कृषि और बागवानी मंत्रियों के अतिरिक्त, नीति आयोग, नाबार्ड के प्रतिनिधि, राज्य सरकारों के अधिकारी, आईसीएआर कृषि वैज्ञानिक और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
  • इस संदर्भ में उपस्थित प्रतिनिधियों को प्रधानमंत्री के समक्ष एक प्रस्तुति के लिए कृषि से संबंधित महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर विचार विमर्श के लिए 5 तकनीकी समूहों में बांटा गया।
  • केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने सिक्किम द्वारा जैविक कृषि के लिए उठाए गए कदमों से दूसरे राज्यों को सीख लेने की बात कही।
  • उन्होंने कहा कि ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ नामक नई योजना का शुभारंभ हो चुका है।
  • इस योजना के अंतर्गत फसल वार और जिला वार मूल्यों के लिए स्वतंत्रता होगी और किसानों के लिए रबी हेतु सिर्फ 2 प्रतिशत और खरीफ के लिए 1.5 प्रतिशत का समान प्रीमियम मूल्य है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि इसकी कोई कैपिंग नहीं होगी और इसलिए भुगतानों में कोई कमी नहीं होगी।
  • उन्होंने कहा कि प्रथम बार फसल कटाई के बाद की हानियों को भी इस योजना में शामिल किया गया है और इसके साथ-साथ दावों के संवितरण और सही अनुमान के लिए प्रौद्योगिकी का व्यापक उपयोग किया गया है।
  • उन्होंने कहा कि किसानों को दीर्घकालीन लाभ के लिए कुछ नई पहलों जैसे- दो वर्षों की अवधि में नियमित रूप से 14 करोड़ कृषि भूमिदारी, सभी किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी करना, देश में जैविक कृषि को प्रोत्साहन देने के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना का कार्यान्वयन, एक समान ई-बाजार मंच के गठन के लिए राष्ट्रीय कृषि बाजार की कुशलता और कार्यान्वयन को पेश किया जा चुका है।
  • केंद्रीय कृषि मंत्री ने ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ (PMKSY) का उल्लेख किया जिसके कार्यान्वयन के लिए निर्धारित क्षेत्रीय विभाग के तौर पर कृषि, सहकारिता और कृषक कल्याण विभाग (डीएसी एंड एफडब्ल्यू) के साथ 5 वर्षों के लिए (2015-16 से 2019-20 तक) 50 हजार करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ पहल की गई है।
  • सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन चामलिंग ने कहा कि जैविक कृषि के लाभ सर्वविदित हैं, लेकिन इसके बावजूद किसी राज्य अथवा दुनिया के किसी देश ने कृषि उत्पादन की अस्थायी और नुकसानदायक तकनीक के व्यापक नीति समाधान के तौर पर इसे नहीं अपनाया है।
  • चामलिंग ने कहा कि 24 फरवरी, 2003 को सिक्किम विधान सभा में एक प्रस्ताव के माध्यम से एक ऐतिहासिक घोषणा के द्वारा सिक्किम को एक संपूर्ण जैविक अभियान में परिवर्तित करने की परिकल्पना पर दृढ़ता के साथ कदम बढ़ाए हैं।
  • चामलिंग ने कहा कि जैविक अभियान को प्रोत्साहन देने के लिए सिक्किम की प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।
  • 17 जनवरी, 2016 को इस सम्मेलन के अतिरिक्त तीन दिवसीय सिक्किम जैविक उत्सव, 2016 को भी प्रारंभ किया गया।
  • सतत विकास, जैविक खेती और ईको-टूरिज्म पर आधारित ‘सतत कृषि’ कृषक कल्याण राष्ट्रीय सम्मेलन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 जनवरी, 2016 को संबोधित किया।
  • प्रधानमंत्री ने 18 जनवरी, 2016 को फूलों की प्रदर्शनी और 19 जनवरी, 2016 को जैविक उत्पादों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
  • उन्होंने सिक्किम में विकसित आर्किड की तीन किस्मों को लांच किया।
  • राज्य को पूर्ण जैविक खेती की यात्रा की ओर ले जाने के लिए सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन चामलिंग को दो प्रशस्तियां दी।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड के 100 प्रतिशत कवरेज के लिए राज्य के दो जिलों को भी प्रशस्ति पत्र सौंपे गए।
  • उन्होंने भारत सरकार की ओर से कराए गए सर्वेक्षण में गंगटोक के दस सर्वाधिक स्वच्छ शहरों में शुमार होने पर बधाई दी।
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यों को एक जिला या ब्लॉक को चुनकर इसे 100 प्रतिशत जैविक इलाके में बदल देना चाहिए।
  • फसल बीमा का कवरेज बढ़ाने, किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी योजनाओं के लिए प्रोत्साहित करने तथा मिट्टी की जांच के लिए प्रयोगशालाओं के एक नेटवर्क बनाने पर कार्य करने का सुझाव प्रधानमंत्री ने दिया।
  • उन्होंने कहा कि किसानों के लिए किसान मोबाइल फोन जैसे उत्पादों की जरूरत है जो उनकी खास जरूरतों को पूरा कर सके।
  • उन्होंने कहा कि पौधरोपण और मवेशी पालन, कृषि गतिविधियों का अटूट हिस्सा होना चाहिए।
  • प्रधानमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि हर राज्य में प्रगतिशील किसानों के लिए डिजिटल ऑनलाइन मंच विकसित किए जाने चाहिए।

लेखक- अशोक चन्द्र  जोशी 

छठां द्वैमासिक मौद्रिक नीति, 2015-16

The sixth bi-monthly monetary policy, 2015-16

रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश पर भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष, 2014-15 से अब प्रत्येक दो माह पर मौद्रिक नीति की घोषणा करनी शुरू की है। मौद्रिक नीति, अर्थव्यवस्था में तरलता (Liquidity), साख की उपलब्धता, निवेश, मूल्य स्तर, रोजगार तथा उत्पादन को प्रभावित करती है। मौद्रिक नीति बाजार में मुद्रा आपूर्ति पर नियंत्रण के साथ-साथ यह भी तय करती है कि रिजर्व बैंक किस दर पर ‘बैंकों को कर्ज देगा’ (Repo Rate) या ‘बैंकों से कर्ज लेगा’ (Reverse-Repo Rate)। मौद्रिक नीति को RBI अपने केंद्रीय बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर तय करता है। जहां विकसित देशों में मौद्रिक नीति का उद्देश्य मुद्रास्फीति की दर को निम्न स्तर पर बनाए रखना होता है, वहीं भारत तथा अन्य विकासशील देशों में इसका उद्देश्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना तथा विकास को गति देना है।
2 फरवरी, 2016 को RBI के गवर्नर डॉ. रघुराम जी. राजन द्वारा ‘छठीं द्वैमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य, 2015-16’ (Sixth Bi-monthly Monetry Policy Statement, 2015-16) जारी किया गया। इस मौद्रिक नीति वक्तव्य के महत्त्वपूर्ण अंश निम्नलिखित हैं-

  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौजूदा और उभरती समष्टि आर्थिक परिस्थितियों के मूल्यांकन के आधार पर छठें द्वैमासिक मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है।
  • उल्लेखनीय है कि ‘चल निधि समायोजन सुविधा’ (Liquidity Adjustment Facility-LAF) के अंतर्गत रेपो दर में कोई परिवर्तन किए बिना इसे 6.75 प्रतिशत के मौजूदा स्तर पर बनाए रखा गया है।
  • चूंकि रिवर्स रेपो दर, ‘रेपो दर’ से 100 आधार अंक नीचे होता है। अतः यह LAF के अंतर्गत इसे भी मौजूदा स्तर 5.75 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा गया है।
  • ‘सीमांत स्थायी सुविधा दर’ (Marginal Standing Facility Rate-MSF) का निर्धारण ‘रेपो दर’ से 100 आधार अंक ऊपर होता है। अतः इसे भी अपरिवर्तित रखते हुए 7.75 प्रतिशत के मौजूदा स्तर पर बरकरार रखा गया है।
  • अनुसूचित बैंकों के CRR (Cash Reserve Ratio) तथा SLR (Statutory Liquidity Ratio) को अपरिवर्तित रखते हुए इसे ‘निवल मांग और मियादी देयताओं’ (Net Demand and Time Liabilities-NDTL) के क्रमशः 4 प्रतिशत और 21.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा गया है।
  • बैंकिंग तंत्र में नकदी की स्थिति में सुधार के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने कालमनी (1 दिन के लिए निधियां उधार लेने अथवा देने) में चल निधि समायोजन सुविधा (LAF) के तहत बैंकों की ‘शुद्ध निवल मांग और मियादी देयताओं’ को 0.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा गया है।
  • 14 दिन की मियादी रेपो सीमा को भी NDTL के 0.75 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा गया है।
  • इस मौद्रिक नीति वक्तव्य में यह प्रत्याशा की गई है कि ‘मुद्रास्फीति’ जनवरी, 2016 के 6 प्रतिशत का लक्ष्य पूरा हो जाना चाहिए।
  • वित्तीय वर्ष 2016-17 के अंत तक ‘मुद्रास्फीति’ लगभग 5 प्रतिशत रहने की संभावना है।
  • वर्ष 2015-16 के लिए जीवीए (GVA) वृद्धि 7.4 प्रतिशत (पूर्व में आकलित), को अपरिवर्तित रखा गया है।
  • जोखिम संतुलन के आकलन के आधार पर वर्ष 2016-17 के लिए जीवीए (GVA) वृद्धि 7.6 प्रतिशत अनुमानित की गई है।
  • छठें द्वैमासिक मौद्रिक नीति के अनुसार, यूरो क्षेत्र के मामले में श्रम बाजार और वित्तीयन की स्थिति में सुधार होने की वजह से उपभोक्ता की व्यय करने की प्रवृत्ति और कारोबार निवेश को बल मिला है।
  • मूल मुद्रास्फीति और मजदूरी दर में कमी आई है।
  • तेल आपूर्ति में ईरान का योगदान बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 30 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल जो कि 12 वर्ष का निम्नतम स्तर है, पर पहुंच गई।
  • ग्रामीण आय दुग्ध और बागवानी जैसे संबद्ध कार्यकलापों जो जीडीपी में खाद्यान्न के रूप में सर्वाधिक योगदान करते हैं, पर निर्भरता बनी रहेगी।
  • घरेलू क्षेत्र की मुद्रास्फीति प्रत्याशाओं का स्तर अधिक रहा और कॉर्पोरेट क्षेत्र के स्टॉफ सदस्यों की लागतों में वृद्धि दर बढ़ी है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र की मजदूरी दर में गिरावट आई है।
  • भारत का निर्यात दिसंबर माह में लगातार 13वें महीने के लिए कम रहा।
  • 22 जनवरी, 2016 की स्थिति के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार 347.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा जो वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक 5.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर की अभिवृद्धि है।
  • 2 फरवरी, 2016 को जारी द्वैमासिक मौद्रिक नीति वर्तमान वित्त वर्ष 2015-16 की छठीं एवं ‘अंतिम’ घोषणा है।
  • वर्ष 2016-17 के लिए पहला द्वैमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य 5 अप्रैल, 2016 को घोषित किया जाएगा।
नवीनतम दरें (2 फरवरी, 2016 से)
बैंक दर 7.75% सीआरआर 4%
रेपो दर 6.75% एसएलआर 21.5%
रिवर्स-रेपो दर 5.75% एमएसएफ दर 7.75%

लेखक-शिव शंकर तिवारी 

2016, अंतर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष घोषित

2016, declared the International Year of Pulses

विश्व भर में दालें मानव के लिए पादप आधारित प्रोटीन एवं एमिनो एसिड (Amino Acid) के महत्त्वपूर्ण स्रोत हैं। साथ ही जानवरों के लिए चारे के रूप में पादप आधारित प्रोटीन का स्रोत भी हैं। दालें खाद्य सुरक्षा और पोषण के उद्देश्य की पूर्ति हेतु टिकाऊ खाद्य उत्पादन में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं। विश्व भर के स्वास्थ्य संगठन मानव के अंदर उत्पन्न होने वाली बीमारी, जैसे-मोटापा, मधुमेह, कैंसर आदि से बचाव हेतु दालों के उपयोग की सलाह देते हैं। इसके अतिरिक्त दालें फलीदार (Leguminus) पौधे हैं जिनका महत्त्वपूर्ण गुण नाइट्रोजन-स्थिरीकरण है जो न केवल मृदा की उर्वरता बढ़ाने में योगदान करते हैं बल्कि इनका पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव होता है। विश्व भर में दालों के उत्पादन एवं उपभोग के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने हेतु 20 दिसंबर, 2013 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा ‘अंतर्राष्ट्रीय दाल वर्ष, 2016’ प्रस्ताव स्वीकृत किया गया। इसी परिप्रेक्ष्य में संयुक्त राष्ट्र संगठन द्वारा हाल ही में ‘अंतर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष 2016’ का शुभारंभ किया गया।

  • 10 नवंबर, 2015 को ‘एक टिकाऊ भविष्य हेतु पौष्टिक बीज’ (Nutritious Seeds for a Sustainable Future) नारे (Slogan) के तहत संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘अंतर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष, 2016’ का शुभारंभ किया गया।
  • ‘खाद्य एवं कृषि संगठन’ (FAO) को सरकारों, संबंधित संगठनों, गैर-सरकारी संगठनों एवं अन्य सभी प्रासंगिक हितधारकों के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष के कार्यान्वयन की सुविधा हेतु नामित किया गया है।
  • अंतर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष 2016 का उद्देश्य दालों के पोषण संबंधी लाभों के विषय में जन जागरूकता को बढ़ाना है।
  • इससे दालों के वैश्विक उत्पादन बढ़ाने, फसल-चक्र के बेहतर उपयोग और दालों के वैश्विक व्यापार में आने वाली चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी।
  • अंतर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष 2016 के कार्यान्वयन का समन्वय एक संचालन समिति द्वारा किया जा रहा है जिसके पाकिस्तान एवं तुर्की सह-अध्यक्ष हैं।
  • संचालन समिति द्वारा एक कार्ययोजना तैयार की गई है जिसमें सभी हितधारकों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष, 2016 के कार्यान्वयन हेतु आयोजित होने वाली गतिविधियों को सूचीबद्ध किया गया है।
  • इस अंतर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष के दौरान खाद्य एवं कृषि संगठन द्वारा दलहन पर एक खाद्य संरचना डाटाबेस का विकास किया जाएगा।
  • गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘2015 को ‘अंतर्राष्ट्रीय मृदा वर्ष’ और ‘2014 को ‘अंतर्राष्ट्रीय पारिवारिक कृषि वर्ष’ घोषित किया गया था। इस संबंध में वर्ष 2016 को ‘अंतर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष’ घोषित किया जाना महत्त्वपूर्ण घटना है।
  • ध्यातव्य है कि भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक (वैश्विक उत्पादन का 25 प्रतिशत), उपभोक्ता (वैश्विक उपभोग का 27 प्रतिशत) और आयातक (14 प्रतिशत) हैं।
  • भारत में प्रति व्यक्ति दालों की उपलब्धता वर्ष 2013 में 41.9 ग्राम/दिन थी जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 80 ग्राम/दिन होनी चाहिए।

लेखक-नीरज ओझा